शनिवार, 11 जून 2011

भारत के विनाश का सपना बुना, भ्रष्टाचार हुआ कई गुणा


क्या आप जानते है मात्र एक चैनल पर सरकार खुद के विज्ञापन का कितना खर्चा करती है ?

विज्ञापन दर -
एनडीटीवी - प्रति 10 सेकेंड का रु॰ 3,810/- (साधारण दिन)
आजतक - प्रति 10 सेकेंड का रु॰ 3,720/- (साधारण दिन)
स्टार न्यूज़ - प्रति 10 सेकेंड का रु॰ 2,490/- (साधारण दिन)
IBN7 - प्रति 10 सेकेंड का रु॰ 2,250/- (साधारण दिन)

भारत निर्माण विज्ञापन
समय = 90 क्षण (सेकेंड)
प्रतिदिन (average - slots / day) - 10 प्रतिदिन (min.)

हर विज्ञापन की अनुमानित लागत -
90 X 2500/- = 2,25,000

प्रति चैनल पर प्रतिदिन विज्ञापन पर अनुमानित खर्चा
2,25,000.00 x 10 = 22,50,000.00

यह पैसा सरकार कॉंग्रेस का नहीं मेहनत लोगो द्वारा भरे गए टेक्स का पैसा है
आप टेक्स भरते है क्या इन विज्ञापनों के लिए ?

अब समझ लीजिये की चैनल क्यूँ कोंग्रेसियों के तलवे चाटते है !
चैनल किसी बॉलीवुड भांड की हरामखोरी का भी स्टिंग नहीं कराते क्यूँ की उनसे उन्हें कमाई होती है, अब प्रश्न है चैनलों को स्वामी रामदेवजी से क्या कमाई है ? कुछ नहीं

जागो भारतीयो जागो ......

*यह आकड़ें विभिन्न समाचार चैनलों की विज्ञापन कीमतों और सरकार द्वारा बुक किए गए विज्ञापनो के आकडे है

स्रोत: http://aaj-samaj.blogspot.com/2011/06/blog-post_11.html

शनिवार, 28 मई 2011

चलो दिल्ली देश बचाना है!

सभी श्रोताओं को रविंदर कुमार का नमस्कार
दोस्तों , आने वाली 4 जून 2011 से स्वामी राम देव जी, लाखो देश भक्त  लोगों के साथ  दिल्ली के राम लीला मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने वाले हैं . इस आन्दोलन का नाम है "भ्रस्टाचार मिटाओ सत्याग्रह"

इस आन्दोलन को शुरू  करने के क्या कारण और उद्देश्य है आईए एक हिंदी कविता के द्वारा सरल और रोचक भाषा में समझने की कोशिश  करते हैं
तो प्रस्तुत है कविता "भ्रस्टाचार मिटाओ सत्याग्रह क्यों?"


जाग उठे हैं लोग देश में, आंधी चलने वाली है
भूख और भ्रष्टाचार में डूबी, रात गुजरने वाली है

चार जून को राम देव जी, दिल्ली को ललकारेंगे -२
हम भी बाबा साथ तुम्हारे , लाखों लोग पुकारेंगे

लाखों लोग करेंगे अनशन, ऐसी क्या मज़बूरी है  -२
जो नहीं जानते गौर करे , ये मुद्दे बहुत जरुरी है

दुनिया के बाकि देशों में, नहीं चलते नोट हजारी है -२
क्यों भारत में हैं बड़े नोट , भारत की क्या लाचारी है

बड़े नोट ही नकली छपते , छोटे नोटों में घाटा है -२
नकली नोट का देश में आना , अपने मुहं पर चांटा है

भ्रस्टाचारी के घर दफ्तर , रेड जहाँ भी मारी है -२
रजाई , गद्दे , तकियों  तक से , निकले नोट हजारी है

बड़े नोट गर बंद किये तो , आतंकी खुद मर जायंगे -२
नकली नोट नहीं होंगे, तो बन्दूक कहाँ से लायेंगे

बड़े नोट बंद करवाना , नहीं मुद्दा कोई निराला है -२
हुआ तीन बार भी पहले , ये फिर से होने वाला है

बड़े नोटों को बंद करो , ये पहली  मांग हमारी है -२
पड़ा जो इसकी खातिर मरना , इसकी भी तयारी है

फिर ना समझना बेवकूफ है  -२ , जनता भोली भाली है -२
जाग उठे हैं लोग देश में, आंधी चलने वाली है
भूख और भ्रष्टाचार में डूबी, रात गुजरने वाली है

आजादी के बाद देश को, नेता इतना लूट गए -२
खादी से विश्वाश के अपने , धागे सारे टूट गए

भ्रष्टाचारी नेता अधिकारी , भारत को खाते जाते हैं
लूट लूट के देश का पैसा , स्विस बैंक पहुंचाते हैं

स्लम डोग हम  कहलाते  , गिनती होती कंगलो में -२
क्योंकि, 400 लाख करोड़ खा गए नेता , पिछले पैंसठ सालो में

जहाँ डाल डाल पर सोने की  चिड़िया  करती थी बसेरा -२
वहां भूख के कारण एक मिनट में , मरते लोग है तेरह

भूख तोडती लोगों के धरम , धर्य , ईमान को -२
नक्सलवादी बना दिया , भूखे मरते इंसान को

स्विस बैंक में जमा खजाना जब वापस आ जायगा  -२
अर्थ व्यवस्था चमकेगी , हर भूखा खाना खायेगा

UN बिल को पास करो , जो काले धन को लायेगा
जब पैसा वापस आ जाएगा , हर गाँव करोडो पायेगा

रुपया आसमान में होगा , कीमत पर इतराएगा
डॉलर उसका होगा चाकर , पैर दबाने आएगा

लोकपाल जनता की लाठी , मारो तो आवाज भी है -२
जाँच सभी की हो चाहे , देश का वो सरताज भी है

लोकपाल कमजोर बने , ये दाळ ना गलने वाली है -२
जाग उठे हैं लोग देश में, आंधी चलने वाली है
भूख और भ्रष्टाचार में डूबी, रात गुजरने वाली है

अंग्रेज गए जब भारत से , आजादी हमको सोंप गए
जितने भी  क़ानून थे काले , सारे हम पर थोप गए




पुराने कानूनों के  कुछ उदाहरण देखे :-

कहने को आजाद है भारत , पर क़ानून पुराने है
भट्ठा और पारसोल के किस्से , सब लोगों ने जाने हैं

IPC और पुलिस एक्ट , और जाने कितने क़ानून यहाँ
भारत माँ के स्वाभिमान का , हर दिन करते खून यहाँ

फसलों की कीमत आज के दिन भी , तय करते अधिकारी है
इनकम  टैक्स के भेद समझना , सर दर्द बड़ा ही भारी है

बड़ी कंपनी ठेका लेकर , जंगल के जंगल साफ़ करे
एक पेड भी आप ने काटा , क़ानून कभी ना माफ़ करे

ऐसे हजार क़ानून पुराने , जनता आज भी झेल रही -२
और सरकारें   बैठ मजे से , 2 जी 3 जी खेल रही

न्याय नहीं है न्यायालों में ,       जब भी माँगा तारीख मिली -२
भोपाल कांड एक बड़ा उदाहरण , ना सजा मिली ना सीख मिली

साढ़े तीन सो साल लगेंगे, पैंडिंग केस निपटने में
न्याय व्यवस्था बुरे हाल में,   देखा सारे ज़माने ने

क्यों हमे खिलाये जाती है, विकसित देशो की  बैन दवा
क्यों नकली दवा के सौदागर , कभी न पाते कोई सजा

क्यों करदाता के खर्चे पर , आतंकी बिरयानी खाते हैं
क्यों उन्हें जवाई बना कर के , हम खुद साले बन जाते हैं

फाँसी  का कानून बने, जो कोई भ्रष्टाचार करे -२
मिलावट करने वालों को , और जो कोई बलात्कार करे

ऐसे सख्त कानून बिना , अब बात ना बनने वाली है  -२
जाग उठे हैं लोग देश में, आंधी चलने वाली है
भूख और भ्रष्टाचार में डूबी, रात गुजरने वाली है

छोटे उद्श्यों में फंस कर , ना जीवन बेकार करो -२
25 करोड़ भूखे हैं हर दिन , उनका थोडा विचार करो

गर समझो बाबाजी ठीक कहैं
सच भी होकर निर्भीक कहैं

बाबा हम भी साथ तुम्हारे , जब नि`कले मुख से ये बोल -२
टोल फ्री एक नंबर ले लो , कर देना उस पर मिस कोल

अब  उठो समर्थन दो उनको  , वर्ना देश प्रेम ये जाली है -२
जाग उठे हैं लोग देश में, आंधी चलने वाली है
भूख और भ्रष्टाचार में डूबी, रात गुजरने वाली है

वन्दे मातरम ||   वन्दे मातरम  ||  वन्दे मातरम ||   वन्दे मातरम
इस आन्दोलन का समर्थन करने के लिए  022 33 08 11 22 नंबर (टोल फ्री )  पर मिस कॉल करे  व्  
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रचियता - रविन्द्र  कुमार  [19 मई 2011]
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बुधवार, 25 मई 2011

आम सूचना

आम सूचना
सभी लोगों को मैं सूचना देना चाहता हूं कि
मैं पिछले कई महीनों से खबर इंडिया khabarindiya.com पोर्टल का संचालन कर रहा था। कुछ कारणों से अभी हाल ही में अर्थात २१ मई २०११ को मैंने खबर इंडिया से पदभार त्याग दिया है। अब मैं खबर इंडिया का हिस्सा नही हूं।
यह सूचना किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति को पैदा होने से रोकने के लिए प्रेषित की जा रही है।


धन्यवाद

अंकुर गुप्ता

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

गूगल के मुताबिक कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश भारत के हिस्से नही

सालों पहले (२००७ में) मैंने एक प्रविष्टि लिखी थी जिसमें ये लिखा था कि गूगल एनालिटिक्स कश्मीर के कुछ हिस्सों को भारत का नही बता रहा था।
ये है उस समय का चित्र
 

आज पुन: अपने गूगल एनालिटिक्स पन्ने को देखा तो सन्न रह गया। पूरा कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश भारत से गायब थे।
ये नक्शा पिछले ४ वर्षों में हुई हमारी क्षति को दिखा रहा है और हमारे मौनमौनहन सिंह जी मौन हैं।

सोमवार, 4 अप्रैल 2011

क्या AICTE भी बिकी हुई है (सूचना के अधिकार के अंतर्गत खुलासा)

मैं सोचा करता था कि हमारे डिग्री कोर्सों में हमेंशा माइक्रोसॉफ्ट इत्यादि के ही सॉफ्टवेयर क्यों होते हैं?
अब पता चला:

सूचना के अधिकार के अंतर्गत श्री नरेन्द्र सिसोदिया जी ने यह जानने का प्रयास किया कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और माइक्रोसॉफ्ट-आटोडेस्क जैसी कंपनियों के बीच क्या अनुबंध हुआ है। तो कहा गया कि यह ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा से जुड़ी चीज है अत: इसका खुलासा नही हो सकता है। AICTE राष्ट्रीय स्तर की सरकारी संस्था है और इससे जुड़े मामलों के साथ जनहित जुड़ा होता है।
यदि हमारे पाठ्यक्रमों में ओपेन ऑफिस या अन्य ऑफिस अनुप्रयोगों के स्थान पर एमएस ऑफिस को ही जोर देकर पढ़ाया जा रहा है और इसके लिए कुछ विशेष कंपनियों से करार किया जा रहा है तो इसका अर्थ है इसमें हमारी शिक्षा से जुड़ी संस्थाएं भी इन कंपनियों के हाथों बिकी हो सकती है।

मंगलवार, 18 जनवरी 2011

क्या आप जानते है भारत का वह स्थान जहाँ सबसे सस्ता भोजन उपलब्ध है ? ............



चाय  = 1 रूपया प्रति  चाय 
 सूप  = 5.50 रुपये 
दाल  = 1.50  रूपया 
शाकाहारी  थाली  (जिसमे दाल, सब्जी  4 चपाती  चावल/पुलाव,  दही, सलाद ) =  12.50  रुपये 
मांसाहारी  थाली  = 22  रुपये 
दही  चावल  =  11  रुपये 
शाकाहारी  पुलाव  = 8 रुपये 
चिकेन  बिरयानी  = 34 रुपये
फिश  कर्री  और  चावल  = 13 रुपये
राजमा  चावल  = 7 रुपये
टमाटर  चावल  = 7 रुपये
फिश  करी  = 17 रुपये
चिकन  करी  = 20 .50 रुपये
चिकन  मसाला  = 24 .50 रुपये
बटर चिकन  = 27 रुपये
चपाती  = 1 रूपया प्रति  चपाती 
एक  पलते  चावल  = 2 रुपये
डोसा  = 4 रुपये
खीर  = 5.50 रुपये प्रति  कटोरी 
फ्रूट   केक  = 9 .50 रुपये
फ्रूट  सलाद  = 7 रुपये
यह वास्तविक मूल्य सूची है

ऊपर बताई  गई  सारी  मदें  " गरीब  लोगों "केवल  और  केवल   के  लिए  है  जो  कि  भारत  के  संसद  की  केन्टीन  में  ही  उपलब्ध  है.  ............. और  इन  गरीब  लोगों  की  तनख्वाह  80,000 रुपये  प्रति  माह  है . ......................... इसके  अलावा  इन्हें  बोनस  के  रूप  में  भारी  से  भारी  घोटाले  करके  अरबों - खरबों  रुपये  हडपने  की  खुल्ली  छूट  है .  
.............. और  ये  सारा  का  सारा  पैसा  पब्लिक  की  जेब  से  जाता  है  जिसे  हम  और  आप  टैक्स  के  रूप  में  चुकाते  है.....................................
स्रोत : ईमेल से मिला

रविवार, 9 जनवरी 2011

रुपये का अवमूल्यन.. देश का अवमूल्यन...

वर्ष - डॉलर के मुकाबले रुपये का मूल्य 
1947 = 1.00

1970 = 7.576 

1975 = 8.409

1980 = 7.887

1985 = 12.369

1990 = 17.504

1995 = 32.427

2000 = 45.000

2006 = 48.336

2007 (Oct) = 38.48

2008 (June) = 42.51

2008 (October) = 48.88

2009 (October)  = 46.37

2010 (January 22)  = 46.21

2011 (January 07)  =45.24