गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

आप लोग हिन्दी/अपनी मातृभाषा के लिए क्या कर रहे हैं?

मैं हिन्दी भाषा के लिए सोच विचार कर रहा था कि तभी एकाएक एक सवाल कौंधा कि अन्य लोग हिन्दी भाषा के लिए क्या कर रहे हैं इसका पता लगाना चाहिए.

मेरा आप सभी से निवेदन है कि कृपया बताएं कि

आपने हिन्दी या अपनी मातृभाषा को “रोटी की भाषा” बनाने हेतु कौन कौन से प्रयास किए हैं, कर रहे हैं या करने की योजना है? यदि उससे संबंधित कोई दस्तावेज हो या इंटरनेट लिंक उपलब्ध हो तो उसका भी उल्लेख करें. यदि कोई प्रयास आप करना चाहते हैं या कर रहे हैं परंतु उसमें बाधा आ रही है तो उसके बारे में भी बताएं. कोई योजना,तरीका या सुझाव भी दे सकते हैं. भाषणबाजी के अलावा सब चलेगा.

यहां पर छोटे से छोटे से प्रयास से लेकर बड़ी बड़ी परियोजनाओं तक के बारे मे बताया जा सकता है.

इंटरनेट पर खोजबीन करने से इस बारे में ज्यादातर भाषणबाजी ही मिली यानि कि हिन्दी को आगे लाना होगा, अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म करनी होगी आदि आदि इत्यादि. पर इन बातों को अमल में कैसे लाया जाए इस पर कोई खास जानकारी मुझे नही मिली. मातृभाषा को रोटी की भाषा बनाने के कौन कौन से प्रयास हो रहे हैं? इसके बारे में मैं ठोस जानकारी चाहता हूं. वैसे तो ये जानकारी मैं अपने स्वयं के उपयोग के लिए मांग रहा हूं. परंतु यदि इस पोस्ट में टिप्पणियों द्वारा कई सारे प्रयासों का उल्लेख हो जाएगा तो ये सभी के लिए एक प्रेरणास्रोत का भी काम करेगी.

आप मुझे ईमेल भी कर सकते हैं: ankurgupta555(*at*)gmail.com

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

कोड आर्गन बनाएगा आपकी साइट की धुन

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http://www.codeorgan.com/Default.aspx पर जाएं. अपनी साइट का पता भरें और क्लिक करें “प्ले दिस वेबसाइट” बटन पर. थोड़ा इंतजार करें फ़िर सुनें अपनी साइट की धुन. ये वेब अनुप्रयोग आपकी साइट के स्रोत कोड को लेकर धुन बनाता है.

है ना मजेदार!

“मूवी” में “मैजिक” कैसे होता है. आइए देखें

ये तो सभी जानते हैं कि फ़िल्मों की कहानियां काल्पनिक होती हैं. ये भी जानते हैं कि फ़िल्मों में कम्प्यूटर की सहायता से विशेष प्रभाव पैदा किये जाते हैं.

आजकल तो साधारण से साधारण दिखने वाले दृश्यों को भी “बनाया” जाता है.

रविवार, 21 फ़रवरी 2010

मेटा रिफ़्रेश को अक्षम करके इंटरनेट एक्सप्लोरर की सुरक्षा बढ़ाएं

मेटा रिफ़्रेश क्या है?

किसी जालपृष्ठ को एक निश्चित समय के अंतराल में दोबारा लोड होने के लिए अथवा किसी अन्य पृष्ठ की ओर पुन:प्रेषित करने के लिए उसके कोड में मेटा टैग को शामिल किया जाता है.

उदाहरण के लिए <META HTTP-EQUIV=REFRESH CONTENT=”5; URL=http://www.yahoo.com”> कोड जब किसी पृष्ठ पर उपयोग किया जाएगा तब जैसे ही आप उस पृष्ठ पर जाएंगे तो ठीक पांच सेकेंड बाद वह आपको याहू डाट काम पर पुन: प्रेषित कर देगा,

इस तरीके का प्रयोग कई बार आपको दूसरे वायरस वाले पृष्ठों आदि में पुन: प्रेषित करने के लिए किया जा सकता है.

इंटरनेट एक्सप्लोरर में सुरक्षा कैसे करें?

सौभाग्य से इंटरनेट एक्सप्लोरर ८ में इस टैग को अक्षम करने की व्यवस्था होती है. इसके लिए टूल्स मीनू से इंटरनेट आप्शन्स में क्लिक करिए.

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अब सिक्यूरिटी टैब में जाकर “इंटरनेट” चुने फ़िर “कस्टम लेवल” नामक बटन पर क्लिक कर दें. इससे आपको एक सिक्यूरिटी सेटिंग्स वाला डायलाग बाक्स मिलेगा. इसमें थोड़ा नीचे आने पर आपको “एलाऊ मेटा रिफ़्रेश” विकल्प मिलेगा इसे अक्षम कर दें.

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और हो गया.

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010

फ़ेसबुक को जीमेल में जोड़ें

फ़ेसबुक समेत कई सारी सोशल नेटवर्किंग सेवाओं को हम अपने जीमेल से जोड़ सकते हैं. इससे होगा ये, कि आपको सभी चीजें एक ही जगह पर मिल जाया करेंगी. आइए देखते हैं कि यह कैसे किया जाए.

सबसे पहले सेटिंग्स में जाएं फ़िर लैब वाली टैब में क्लिक करें.

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अब सबसे नीचे आएं. आपको “यूआरएल के द्वारा कोई भी गैजेट जोड़ें का विकल्प दिखेगा. इसे सक्षम करें. और फ़िर “परिवर्तन सहेजें” वाली बटन में क्लिक करें.

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आप आपका जीमेल दोबारा लोड होगा. अब फ़िर से सेटिंग्स में क्लिक करें.

अबकी बार आपको गैजेट नाम की एक टैब नजर आएगी. इसमें क्लिक करें.

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अब आपको गैजेट का यूआर एल भरने को कहा जाएगा.

फ़ेसबुक गैजेट का यूआरएल है:

http://hosting.gmodules.com/ig/gadgets/file/104971404861070329537/facebook.xml

इसे भरें और जोड़ें बटन में क्लिक करें.

अब आपको साइडबार में फ़ेसबुक गैजेट नजर आएगा.

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इसमें छोटे छोटे अक्षरों से expand लिखा होगा. उसमें क्लिक करें.

और लीजिए फ़ेसबुक आपके जीमेल के भीतर हाजिर है.

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इसी प्रकार आप और भी सेवाओं को गैजेट बनाकर जोड़ सकते हैं.

ट्विटर : https://twittergadget.appspot.com/gadget-gmail.xml

माईस्पेस: http://hosting.gmodules.com/ig/gadgets/file/100080069921643878012/myspace.xml

डिग: http://digg.com/goog/ig.xml

ओर्कुट स्क्रैपबुक: http://hosting.gmodules.com/ig/gadgets/file/105297062528314471242/doomer_orkut_scrapbook.xml

याहू मेल: http://karthik.gadgets.xmlgadgets.com/ymail.xml

हाटमेल: http://karthik.gadgets.xmlgadgets.com/hot-mail.xml

फ़्रेंडफ़ीड: http://friendfeed.com/embed/googlegadget/spec

डिलीशियस: http://www.labpixies.com/campaigns/delicious/delicious.xml

 

साभार: http://savedelete.com/gmail-power-tips-how-to-integrate-your-facebook-twitter-yahoo-friendfeed-in-your-gmail.html

गूगल यानि कि बम कैसे बनाते हैं?

शीर्षक पढकर चौंक गए?

आपने यूआरएल छोटा करने की सेवाओं के बारे में तो खूब सुना होगा. उपयोग भी किया होगा. अभी एक नई सेवा आई है, नाम है www.shadyurl.com.

ये आपके असली यूआरएल के पते को खतरनाक और संदेहजनक बना देती है. मैंने गूगल का पता इसमें डालकर देखा तो इसने कुछ ऐसा यूआरएल बनाया:

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फ़ेसबुक का पता बना: http://5z8.info/enriched-uranium-supply_a1t6_friendster-of-sex

एमएसएन: http://5z8.info/refugee-murder_q6i2_protocols-of-the-elders-of-zion.doc

एप्पल डाट काम : http://5z8.info/oneweirdoldtiptolosebellyfat_s3z9_guns

 

तो है ना ये मजेदार?

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

जी हां! अब आप बज्ज की बोलती बंद कर सकते हैं.

लोगों की प्रतिक्रियाएं मिलने के बाद गूगल ने बज्ज में कई सुधार किये हैं. और अब बज्ज की बोलती बंद करना बहुत आसान हो गया है.

अपने जीमेल में सबसे ऊपर सेटिंग्स में क्लिक कीजिए.  अब बज्ज वाली टैब में जाइए:

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यहां पर गूगल बज्ज को पूरी तरह से अक्षम करने का विकल्प दिया है. उसमें क्लिक कर दें.

अब आपको ये चेतावनी मिलेगी

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साफ़ है कि यदि आपने “Yes” बटन पर  आपकी सारी बज्ज पोस्टें तथा सार्वजनिक प्रोफ़ाइल आदि हमेशा के खत्म हो जाएगी.

बुधवार, 17 फ़रवरी 2010

क्या आपके कम्प्यूटर में ड्राइव पर क्लिक करते ही Open With… का डायलाग बाक्स दिखता है?

क्या आपके कम्प्यूटर में माई कम्प्यूटर में किसी ड्राइव के आइकान पर क्लिक करते ही open with का डायलाग बाक्स दिखता है?

कुछ ऐसे:

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यदि हां तो पहले जांच लें कि आप किसी वायरस आदि से ग्रस्त तो नही हैं. मेरे कम्प्यूटर में एक वायरस था जो कि हर ड्राइव में कामसूत्र नाम का एक फ़ोल्डर बना देता था और उसका आइकान रिसाइकिल बिन जैसा रख देता था. इसी फ़ोल्डर की भीतर एक वायरस फ़ाइल घुसी होती थी. इसके अलावा ये हर ड्राइव की मुख्य डायरेक्ट्री में autorun.inf फ़ाइल भी बना देता था, जिसमें वायरस की फ़ाइल का लिंक था. ताकि जब कोई उस ड्राइव को खोले तो अपने आप वायरस वाली फ़ाइल क्रियान्वित हो जाए.

मैंने उस फ़ोल्डर और उस EXE फ़ाइल को तो मिटा दिया परंतु ये ओपेन विथ वाला झमेला शुरू हो गया.

यदि आप भी कुछ ऐसी ही समस्या से जूझ रहे हैं तो पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके कम्प्यूटर में कोई वायरस ना हो. फ़िर इस मुफ़्त की यूटिलिटी, डिस्क हील को डाउनलोड करके स्थापित कर लें. डाउनलोड का पता है.www.computer-realm.net/diskheal/

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इसके “FIX” वाले हिस्से में जाइए और जो भी ड्राइव आपको ठीक करनी हो उसका ड्राइव लेटर भरकर फ़िक्स बटन पर क्लिक कर दें.

यदि असर तुरंत ना दिखे तो एक बार कम्प्यूटर को दोबारा चालू भी करके देख लें.

इस यूटिलिटी से आप कम्प्यूटर पर और भी कई सारे फ़ेरबदल कर सकते हैं जैसे कि फ़ोल्डर आप्शन्स के विकल्प को अक्षम करना, आल प्रोग्राम्स के मीनू को ही छुपा देना आदि.

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शनिवार, 13 फ़रवरी 2010

बज्ज में एक और गड़बड़

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जरा ऊपर दिये हुए चित्र पर गौर फ़रमाएं.

बज्ज में जो कुछ आप पोस्ट करते हैं बाद में उसे सुधार भी सकते हैं, ब्लाग की ही तरह. परंतु बज्ज कुछ ज्यादा ही आसान है इस प्रकार की शरारतें करने के लिए.

पहले कोई सवाल लोगों से पूछिए. जब लोगों के जवाब टिप्पणियों में आ जाएं तो फ़िर सवाल को ही बदल दिजिए. और कुछ ऐसा सवाल लिख दीजिए कि टिप्पणियों के अर्थ का अनर्थ को जाए. मजे लीजिए.

ऊपर दिया हुआ चित्र http://www.thedoghousediaries.com/?p=1267 से लिया गया है.

यदि आपने भी कुछ ऐसी शरारत की है तो उसे यहां पोस्ट कर सकते हैं:http://www.facebook.com/pages/Doghouse-Diaries/181585151794?ref=ts#!/photo_search.php?oid=181585151794&view=all

और दूसरों की शरारतें भी देख सकते हैं.

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010

आइए बज्ज की बैंड बजाएं

बज्ज लोगों पर उसी तरह थोपा गया है जिस तरह भारतीयों पर अंग्रेजी जबरन थोपी गई. मैंने पिछली पोस्ट में आपको बताया था कि बज्ज को बंद कैसे करें. परंतु असल में उससे बज्ज अक्षम नही होता है. (तभी तो बोल रहा हूं कि ये थोपी गई चीज है)

मैंने बज्ज बंद किया परंतु फ़िर भी मेरे द्वारा बजियायी गई चीजें हटी नही. प्रोफ़ाइल में भी सब कुछ जस का तस. आप बज्ज की बैंड बजा सकते हैं परंतु यदि आप ये काम करना चाहते हैं तो आपको ये अभी करना होगा वरना बाद में करने में दिक्कतें आएगी. तो शुरू करें:

चरण १

बज्ज बंद ना करें. क्योंकि “बज्ज बंद करे” वाले लिंक में क्लिक करने से ये बंद नही होता है.

चरण २

अब http://www.google.com/profiles वाले पेज में जाकर अपना प्रोफ़ाइल खोलें 

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अब एक एक करके हर बज्ज को मिटाते जाएं

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अब आप समझ सकते हैं कि मैंने ये क्यों कहा कि ये काम जितनी जल्दी हो सके कर लें. क्योंकि कल को जब आपकी ढेर सारी पोस्टें हो जाएंगी तो फ़िर इन्हे हटाना काफ़ी कठिन कार्य होगा.

एडिट प्रोफ़ाइल में क्लिक करके जितना कुछ हटाना हो सब हटा दें.

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चरण ३

पर बज्ज में अभी सब कुछ नही गया अत: कोने वाली बटन में क्लिक करके प्रत्येक पोस्ट को हटाते जाएं

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टिप्पणियां हटाने के लिए आपको संपादित करें बटन पर क्लिक करना होगा.

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फ़िर टिप्पणी हटाएं बटन पर.

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चरण ४

लोगों को अवरोधित करें: यदि आप वाकई में बज्ज के पब्लिक रिकार्ड से गायब होना चाहते हैं तो इसके लिए जरूरी है कि आप दूसरों को गायब दिखें अत: ऐसे में अवरोधित करना उचित होगा.

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अब इसमें सभी को एक साथ अवरोधित करने का तो विकल्प नही है अत: सबको एक एक करके अवरोधित करना होगा. अवरोधित करने के फ़ायदे/नुकसान निम्नलिखित हैं.

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लेकिन चिंता मत कीजिए यदि आपका मन भविष्य में बदल जाता है तो आप उन्हे अनवरोधित भी कर सकते हैं.

चरण ५

अब बज्ज को बंद किया जा सकता है.

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यह तरीका मुझे सीनेट की साइट में मिला http://news.cnet.com/8301-17939_109-10451703-2.html?part=rss&subj=news&tag=2547-1_3-0-20

यदि आपको कुछ और पता चले तो बताइएगा. वैसे कुछ लोगों के नाम पर क्लिक ही नही हो रहा था ताकि उन्हे अवरोधित किया जा सके. पता नही क्यो?

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

बज्ज बजा सकता है आपकी गोपनीयता की बैंड

गूगल ने हाल में ही अपना एक नया उत्पाद गूगल बज्ज के नाम से जारी किया है. जिसे देखकर लगता है कि गूगल अब फ़ेसबुक और ट्विटर से टक्कर लेना चाहता है. परंतु सावधान. बज्ज आपके जीमेल इनबाक्स से सीधे जुडा होता है. और इस चित्र को देखिए कि ये किस प्रकार आपकी गोपनीयता की बैंड बजा सकता है:

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यानि कि आपके प्रोफ़ाइल को देखकर कोई भी व्यक्ति जान सकता है कि आपका संपर्क किससे किससे है और इसके आधार पर कई सारे अंदाजे  लगाए  और निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं.

आप बोलेंगे फ़ेसबुक में तो ये सब पहले से ही है तो फ़िर जीमेल में आने से हाय तौबा क्यों. दरअसल बात ये है कि फ़ेसबुक जैसी साइटों में लोग नकली प्रोफ़ाइल बनाकर अथवा नियंत्रित रूप से जानकारी साझा करते हैं. फ़ेसबुक जैसी साइटें आपके ईमेल एकाउंट से सीधे जुड़ी नही होती हैं.

लोग बाग ईमेल पतों पर काफ़ी निजी जानकारी रखते हैं. कुछ ऐसे संपर्क सूत्र भी होते हैं जिन्हे सार्वजनिक करना सही नही होता. बज्ज के ईमेल से जुड़े होने के कारण ये एक तरह से आपके ईमेल के संपर्क सूत्रों की जानकारी एकदम से सबको उपलब्ध करा देता है. अब आप बोलेंगे कि ये कैसे होता है.

असल में जब आप बज्ज शुरू करते हैं तो आप सबसे पहले अपने संपर्क सूत्रों का अनुसरण करना शुरू करते हैं. और ये जानकारी सार्वजनिक हो जाती है.

अब ये तो फ़िर भी कुछ नही है. आगे देखिए ये स्क्रीनशाट. लिखा है कि मेरा प्रोफ़ाइल गूगल के खोज परिणामों में दिखाए जाने योग्य नही है.

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जब मैंने एड मोर इंफ़ो टु माई प्रोफ़ाइल में क्लिक किया तो कुछ ऐसा दिखाई दिया

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यानि कि मैं कहां बड़ा हुआ, कहां रहता हूं और किस कंपनी में काम करता हूं जैसी पूरी जानकारी यदि मैं यहां दे दूं तो दुनिया भर के लोग मुझे खोज परिणामों में कुछ इस प्रकार से पाएंगे:

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और हां स्क्रीनशाट में एक हिस्सा कट गया है जिसमें मेरे प्रोफ़ाइल से मेरी साइट को जोड़ने की बात कही गई है. अब मुझे ये नही पता चला कि गूगल को ये क्यों लगता है कि वो साइट मेरी है. यानि कि उसे पता कैसे चला? और यदि मैं उसे सत्यापित कर दूं तो फ़िर हो सकता है कि मेरी साइट संबंधी खोज के साथ मेरे प्रोफ़ाइल का भी लिंक आने लगे.

यदि आप कोई छद्म नाम से किसी प्रकार की साइट चला रहे हैं और उसकी जानकारी गलती से गूगल एकाउंट जुड़ गई तो फ़िर गए काम से.

अच्छा ही हुआ कि मेरा प्रोफ़ाइल अभी इस योग्य नही कि उसे खोज परिणामों में दिखाया जा सके. परंतु डर अब भी है.  यदि गूगल किसी एल्गोरिद्म की मदत से मेरे सभी ईमेलों को छांटे और फ़िर सारी जानकारी निकालकर मेरे प्रोफ़ाइल को बना दे तो मैं क्या कर सकूंगा. अगर जानकारी को मिटा भी दिया तो भी गूगल कैश प्रति में उसकी एक प्रति रख सकता है.

गूगल ने डीएनएस सर्वर भी चालू किया. जब हम अपने ब्राउजर में किसी साइट काम नाम टाइप करते हैं तो यह अनुरोध पहले DNS सर्वर में जाता है फ़िर वह इसे शब्दों से आईपी पतों में बदल देता है. अब यदि आप Google DNS का प्रयोग कर रहे हैं तो ध्यान दीजिए कि आप कौन कौन सी साइटें खोलते हैं इसकी जानकारी गूगल के पास पहुंच जाती  है. और आपके ब्राउजर की private browsing भी इस मामले में कोई काम नही आती.

तो इस सबसे बचा कैसे जाए?

ज्यादा सुविधाओं के चक्कर में पड़ने से बचिए.  यदि छद्म नाम से कुछ कर रहे हों तो ये और भी जरूरी है.

ब्लाग आदि लिखते हों तो उसके ऊपर पूरा नियंत्रण रखने के लिए कुछ पैसे खर्च कीजिए ज्यादा नही डेढ़ दो हजार सालाना तक में आपका काम बन जाएगा. होस्टिंग तथा डोमेन नाम खरीदिए. होस्टिंग प्रदाता ईमेल सर्वर की भी सुविधा देते हैं अत: उसी ईमेल का प्रयोग कीजिए. सामान्य चैटिंग तथा ईमेल आदि के लिए आप जीमेल/याहू का प्रयोग कर सकते हैं परंतु निजी/गुप्त जानकारियों को वहां पर साझा करने से बचा जा सकता है.

यदि आप स्वयं की होस्टिंग का प्रयोग करते हैं तो आपको कुछ मेहनत भी करनी होगी जैसे ईमेल बैकअप, ब्लाग का डाटाबेस बैकअप, स्क्रिप्ट अपग्रेड आदि. परंतु आपकी जानकारी सुरक्षित रहेगी.

डीएनएस के मामले में आप अपने इंटरनेट सेवाप्रदाता का DNS प्रयोग करें. भई हम कौन सी साइट खोलते हैं इसकी जानकारी केवल हमारे आई एस पी के पास ही होगी. और उसके पास इसका कोई खास उपयोग नही होगा. परंतु गूगल जैसी कंपनी के पास ऐसी जानकारी सुरक्षित नही है क्योंकि वो एक दूसरे से जुड़ी हुई कई सारी सेवाएं चलाता है. और कहीं से भी जानकारी लीक हो सकती है.

बज्ज ने खोली दिमाग की खिड़कियां.

यदि बज्ज ना आता तो शायद मैं कभी इतना नही सोचता. अब मुझे भी लगने लगा है कि इन कंपनियों से अधिक जुड़ाव ठीक नही है. परंतु एकदम से इन्हे छोड़ा भी नही जा सकता है. अत: धीरे धीरे बदलेंगे क्योंकि अब डर लगने लगा है.

बज्ज बंद करने के लिए आपके जीमेल के पेज पर सबसे नीचे एक लिंक दिया होता है “Buzz बंद करें” इसपर क्लिक करके आप इसे बंद कर सकते हैं.

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भविष्य का क्या?

मुझे लगता है कि सोशल नेटवर्किंग का वर्तमान तो बहुत अच्छा है परंतु भविष्य को लेकर मेरे मन में संदेह है. क्योंकि अभी तो ये शुरूआत है. जब ये बढ़ेगा तो लोग परेशान हो जाएंगे अपनी जानकारी छुपाने की असफ़ल प्रयास करते हुए मिलेंगे. और शुरू होगा गोपनीयता का व्यापार. यानि कि ऐसे साफ़्टवेयर उत्पाद बनाए जाएंगे जिनसे आप अपनी जानकारी सार्वजनिक होने से रोक सकेंगे.

अद्यतन. कृपया ध्यान दें!

बज्ज को बंद करने का ऊपर दिया हुआ तरीका कारगर नही है. और इससे कुछ भी नही होता है. बज्ज को बंद करने का तरीका यहां विस्तार से पढ़ें.

http://ankurthoughts.blogspot.com/2010/02/blog-post_12.html