शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

एक ओर पानी की किल्लत है और दूसरी ओर लोग सड़कों को नहला रहे हैं

आजकल देखता हूं कि हमारे मुहल्ले का करीब करीब हर परिवार सुबह या शाम को पाइप से पूरी सड़क नहलाने में लगा रहता है। मुझे गर्मी में ऐसा करना बिल्कुल ही अजीब लगता है। क्या लोगों को पानी की कीमत नही पता है? सड़क को पानी से नहलाकर वो कितनी देर तक ठंडक पैदा कर लेंगे?
अभी तक मैंने अपनी गली के लोगों को ऐसा करते देखता था आज तो हद उस समय हो गई जब मैंने मुख्य सड़क को नहलाते हुए देखा, जिसपर लगातार मोटर गाड़ियां आ जा रही थीं।
एक ओर लोग प्यासे मर रहे हैं और दूसरी ओर लोग इस प्रकार पानी बर्बाद कर रहे हैं।

यदि आपको कोई इसका सही कारण पता हो तो बताएं। वैसे गर्मी में जब पानी की कमी हो जाती है ऐसे में मुझे यह एक बेहद घटिया काम लग रहा है।

8 टिप्‍पणियां:

  1. जहाँ एक और पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है वहां ऐसा काम निसंदेह घटिया है

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  2. यही तो बिडम्बना है
    कोई खा खा के मरता है तो कोई बिन खाये

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  3. सड़क पर पानी छिडकने वाली लोगों की बहुत ही गन्दी आदत है साथ ही लोग अपने घरों को धो कर पानी सड़क पर बहते है इससे एक तो पानी की बर्बादी होती है दूसरी ओर तारकोल से बनी सड़क टूटती है यही नहीं घर के बाहर पानी फ़ैलाने से गिला होने पर जो लोग भी घर में आते है उनके जूतों के साथ गिला होने के चलते मिटटी भी ज्यादा आती है | पर ये बात किसी को समझ नहीं आती | मुझे भी बहुत बुरा लगता है जब अपने मोहल्ले में लोगों को घर धो कर पानी सड़क पर बहते देखता हूँ |
    हाँ अपने घर पर मैंने सख्त हिदायत दे रखी है कि इस तरह पानी की बर्बादी कोई नहीं करेगा |

    जोधपुर में आज से पन्द्रह साल पहले मैं एक मकान में दो साल तक किरायेदार रहा , मैंने जब वह मकान किराये पर लिया उसके बाद पता चला कि मेरे से पहले जितने भी किरायेदार आये थे वे झगडा करके मकान खाली करके गए | लेकिन वहां रहने पर मुझे पता चला कि झगड़े की जड़ किरायेदारों द्वारा पानी की अनावश्यक बरबादी थी | चूँकि मेरे पुरे परिवार को पानी के सही व कम इस्तेमाल की पहले से आदत थी सो हमारा उनसे कभी कोई मतभेद ही नहीं हुआ और आज पन्द्रह साल बाद भी उनके साथ हमारे मधुर सम्बन्ध बने हुए है |

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  4. ye to ahi hi main jis company me hun wahan to aksar ye kaam hota hai...
    http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

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  5. ऐसा करना गलत है
    कपडे, बर्तन, गाडी आदि धोने के बाद मैले पानी से सडक गीली की जा सकती है। वैसे छिडकाव के बाद धरती की गर्मी निकलने से ज्यादा गर्मी महसूस होने लगती है।

    प्रणाम

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  6. ऐसा चलता रहा तो एक दिन धोना दूर पीने को भी पानी नसीब न होगा।

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  7. बुंदेलखणड में जहाँ दबंगों ने अपने हैण्डपम्प पर ताले लगा रखे हैं और पानी को गरीबों में बेच रहे हैं वहीं कुछ लोग सडकों को पानी से नहा रहे हैं कहीं-कहीं तो जल बोर्ड की इतनी लाप्रवाही रहती है कि सैकडों गैलन पानी बरबाद होता रहता है पर प्रशासन की नींद नहीं खुलती। इसके पीछे पानी मफिया भी काम करता है। आम लोग तो उससे ऊपर है जब मिलता है तो कद्र कोई नहीं करता कीमत का चीज नहीं होने पर ही पता लगती है।

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  8. जब पानी बिलकुल नही रहेगा क्या तब कीमत जानेंगे लोग ?

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