सोमवार, 31 अगस्त 2009

लाइनेक्स आपके बच्चे को झूला झुलाकर सुला भी सकता है. [गीकी मस्ती]

जी हाँ! आपका लाइनेक्स आपके नन्हे मुन्ने को झूला झुलाकर सुला भी सकता है। कैसे? देखिये ये वीडियो:



साभार मेक यूज आफ http://www.makeuseof.com/tech-fun/linux-baby-rocker/

रविवार, 30 अगस्त 2009

किन्ही दो भोज्य पदार्थों के पोषक तत्वों की तुलना करें [वेब एप्लिकेशन]

आप जो खा रहे हैं वो क्या वाकई में आपके लिये उतना स्वास्थ्यप्रद है या नही? किस भोज्य पदार्थ में अधिक पोषक तत्व हैं. इन सबकी तुलना करने के लिये अब आपको बाजार से कोई किताब खरीदने की जरूरत नही है.

http://www.twofoods.com/ एक ऐसी साईट है जिससे कि आप दो भोज्य पदार्थों के पोषक तत्वों की तुलना कर सकते हैं.

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आशा है ये वेब एप्लिकेशन आपके काम आयेगा.

सोनी ईबुक लाइब्रेरी साफ़्टवेयर करेगा आपकी ई-पुस्तकों का प्रबंधन

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गूगल ने ढेर सारी पुस्तकों को पब्लिक डोमेन में उपलब्ध कराया है. (गूगल बुक्स में)

अत: अगर आपका ईबुक कलेक्शन बड़ा हो गया हो तो सोनी का ईबुक लाइब्रेरी साफ़्टवेयर आपकी किताबों को पढ़ने, खोजने और प्रबंधित करने में काफ़ी मदत करेगा.

ये साफ़्टवेयर एक तरह से ईबुक्स का आई ट्यून्स है. यानि कि आप सीधे सोनी की लाइब्रेरी को ब्राउज कर सकते हैं किताबें खरीद सकते हैं और उन्हे इस साफ़्टवेयर में पढ़ सकते हैं.

यह फ़्री है तथा मैक और विंडोज दोनो के लिये उपलबध है. इसे डाउनलोड करने के लिये यहां जायें:

http://ebookstore.sony.com/download/

आपके इंटरनेट कनेक्शन की स्पीड कितनी है?

आज एक पोल! बताइये आपके इंटरनेट कनेक्शन की स्पीड कितनी है?

स्पीड जांचने के लिये http://www.speedtest.net/ पर जायें पर ये स्पीड हमेशा एमबीपीएस में दिखाता है.

वैसे स्पीड आप यहां से भी जांच सकते हैं: http://speed.airtelbroadband.in/

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उबंतू मे स्वतः लाग इन सक्षम करना

उबंटू को जब भी हम चालू करते हैं तो ये एक लाग इन विण्डो दिखाता है। अब अगर एक ही उपयोगकर्ता है तो बार बार पासवर्ड डालने के झंझट से सब बचना चाहेंगे। अत: इसमे स्वतः लाग इन को सक्षम कर देने से कम्प्युटर चालू करने के बाद सीधे डेस्कटॉप दिखाई देने लगती है।
उबंटू मे स्वतः लाग इन सक्षम करने के लिए System > Administration > Login Window मे जाएँ।



इसमे सिक्यूरिटी टैब मे जाइए और Enable Automatic Login को सक्षम कर दीजिये। फ़िर उस एकाउंट को चुनिए जिसमे लाग इन करना है।

Close बटन मे क्लिक करके विण्डो बंद कीजिये।
स्वतः लाग इन की जांच करने के लिए एक बार कम्प्युटर दोबारा चालू करके देखिये।

लाइनेक्स मे फोन्टों का प्रबंधन करें

फॉण्ट मैनेजर एक बहुत ही छोटा सा फोन्टों को प्रबंधित करने का साफ़्टवेयर है। ये छोटा जरूर है पर बहुत काम का है।
इसे आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं। अगर आप उबंटू उपयोगकर्ता हैं तो आपको डेब पॅकेज डाउनलोड करना चाहिए।
http://code.google.com/p/font-manager/



इस साफ़्टवेयर के द्वारा आप फोन्टों को प्रीव्यू , सक्षम, अक्षम कर सकते हैं। उन्हें वर्गीकृत भी कर सकते हैं। आप चाहें तो किसी फॉण्ट को हटा भी सकते हैं। यह साफ़्टवेयर आपको अपने कम्प्यूअर मे मौजूद सारे फोंटो को एक जिप फाइल मे आर्काइव के तौर पर सुरक्षितकरने की सुविधा भी प्रदान करता है.
ये साफ़्टवेयर काफ़ी काम का है। एक बार ज़रूर आजमाइएगा।

लाइनेक्स मे वीडियो एडिटिंग के लिए एक धाँसू साफ़्टवेयर




अभी हाल ही मे मुझे एक वीडियो एडिटिंग का एक साफ़्टवेयर हाथ लगा। नाम है ओपन शाट वीडियो एडिटर। ये कुछ कुछ विन्डोज़ मूवी मेकर की तरह दीखता है। पर निर्यात के लिए ढेरों फार्मेटों को समर्थन देता है।


इसमे मल्टी ट्रैक और ट्रांसिशन की भी सुविधा है।



ये कमर्शियल साफ़्टवेयर जैसे एडोब प्रीमियर के आगे तो कुछ भी नही है पर घरेलू काम आप आराम से मुफ्त मे कर सकते हैं।
इसे आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं:
http://www.openshotvideo.com/2008/04/download.हटमल

एक बात ध्यान रखें की आपको दो फाइलें डाउनलोड करनी पड़ेगी। एक मूल फाइल होगी और दूसरी के अन्दर चार फाइलें और होंगी जो की निर्भरता को पूरा करेंगी। अत: पहले उन्हें इंस्टाल करें फ़िर मूल फाइल को।
सभी डेब पॅकेज हैं अत: इंस्टाल करने मे कोई दिक्कत नही होगी।

Technology Nerd ने दिया System Mechanic का फ़्री लाइसेंस

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टेक्नोलाजी नर्ड के ब्लाग में मुझे एक घोषणा दिखी. घोषणा ये थी कि वो सिस्टम मैकेनिक का १ साल का ३ कम्प्यूटरों का फ़्री लाइसेंस दे रहे हैं. यकीन नही होता? स्क्रीनशाट देखिये! बदले में क्या करना है? बस फ़ेसबुक में टीनर्ड का फ़ैन बनना है.मैंने ऐसा ही किया और मुझे एक ईमेल उन्हे भेजना पड़ा. कुछ देर में सिस्टम मैकेनिक की “एक्टिवेशन की” मेरे इनबाक्स में थी. मैनें इन्स्टाल किया और ढेन टे टेन!!!! सिस्टम मैकेनिक एक्टिवेट हो गया.

इसके लिये टेक्नोलाजी नर्ड को बहुत बहुत धन्यवाद. वैसे ये आफ़र सीमित समय के लिये है. अधिक जानकारी के लिये इधर नजर मारें:

http://tnerd.com/2009/08/28/get-system-mechanic-9-free-get-the-best-out-of-your-computer-with-system-mechanic-9/

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सिस्टम मैकेनिक के इतने लाइसेंस की कीमत करीब चालीस डालर है.

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टेक्नोलाजी नर्ड भी एक अंग्रेजी तकनीकी ब्लाग है. यहां भी आपको लाइनेक्स संबंधी जानकारी मिल जायेंगी.

शनिवार, 29 अगस्त 2009

“मशीने मनुष्यों पर राज करेंगी” पर मेरे विचार

एक दिन मेरी अपने नानाजी से बातचीत हो रही थी. बातों बातों में वो बोल गए कि अमेरिका से अच्छी चीजें सीखना, रोबोट बनाना मत सीखना. मैने पहली बार सुना तो थोड़ा चौंक गया. फ़िर मुझे लगा कि कहीं ना कहीं उनके मुंह से वो डर बोल रहा था जो कि आजकल के इंडिया टीवी टाइप न्यूज चैनल फ़ैला देते हैं. वैसे दूसरे चैनल भी कम नही हैं.

सबसे पहली बात पूरी दुनिया में अभी तक ऐसी कोई मशीन नही है जिसमें एक काकरोच के बराबर भी बुद्धि हो. मनुष्य का दिमाग दुनिया की सबसे अधिक जटिल संरचनाओं में से एक है. और कम से कम मशीनें अभी उतनी जटिल नही हो पाई हैं. ऐसा मैं इसलिये भी कह सकता हूं क्योंकि मैंने एक दिन ए आई एम एल (आर्टीफ़ीशियल इंटिलीजेंस मार्कअप लैंग्वेज) को देखा. और ये अंदाजा लगाया कि मनुष्य के इतना सोचने के लिये इसमें अभी बहुत बहुत काम करना पड़ेगा. मनुष्य का दिमाग अपने आप में मनुष्य के लिये पहेली है. रोजाना नये प्रयोग होते हैं और नये तथ्य सामने आ रहे हैं. लेकिन अभी भी हम पूरी तरह से दिमाग को समझ नही पाये हैं. जिस दिन हम इसकी जटिलताओं को सुलझा लेंगे उस दिन शायद हम ऐसी मशीनें भी बना लें.

भविष्य में मशीनें मनुष्यों पर राज क्यों नही कर सकती हैं?

क्योंकि भविष्य ओपेन सोर्स का है. जी हां! मुझे लगता है कि किसी भी प्रकार की मानवीय भूल से निपटने का तरीका ओपेन सोर्स है. ना केवल साफ़्टवेयरों के मामले में बल्कि हार्डवेयरों के मामले में भी. उदाहरण के लिये एक संभावना व्यक्त की गई कि बहुत से नैनों रोबोट्स को समुद्र में फ़ैला तेल साफ़ करने के लिये छोड़ा गया पर प्रोग्रामिंग की एक गलती की वजह से वो हर  कार्बन से बनी चीजों को नष्ट करते गये. सुनने में ये बहुत बहुत डरावना लगता है. पर अगर हम इस पूरी तकनीक को ओपेन सोर्स कर दें तो पूरी दुनिया के एक्सपर्ट इस पर काम कर सकेंगे और हल खोज सकेंगे.

मैं समझता हूं कि ऐसी कोई भी तकनीक जिसका मामला सीधे जनता से जुड़ा हो मुफ़्त तथा मुक्त होनी चाहिये. जैसे कि वोटिंग मशीन का साफ़्टवेयर. अगर यह ओपेन सोर्स हो तो इसमें मौजूद हर खामी का पता जल्दी चलेगा तथा चुनाव भी अधिक ईमानदारी से संपन्न होंगे. अभी होता ये है कि किसी को इसके साफ़्टवेयर का पता नही तो कुछ दल अपनी ताकत के दम पर इंजीनियरों से इसे हैक करवा सकते हैं.

डर फ़िर भी है. लेकिन डरने की जरूरत नही है.

मुझे लगता है कि अगर कोई व्यक्ति असली दुनिया में अपराध करता है तो शायद वो बच जाये लेकिन इंटरनेट की आभासी दुनिया में नही बच सकता है. ऐसा इसलिये क्योंकि गीक्स की ये फ़ितरत ही होती है कि आप कुछ बनाओ और हम उसका तोड़ निकाल देंगे. यानि कि अगर आपने किसी तरीके से कोई फ़्राड कर भी दिया तो दूसरे तकनीकी गुरू उसका तोड़ निकालने में भिड़ जायेंगे(आदत से मजबूर जो होते हैं).

अब बात करते हैं क्लाउड की.

अभी जितनी जानकारी मुझे क्लाउड की हुई है उससे मुझे लगता है कि इसके अपने फ़ायदे और नुकसान हैं. फ़ायदा ये कि आपका डाटा एक जगह होता है आप उसे कहीं से प्राप्त कर सकते हैं. साफ़्टवेयरों को इंस्टाल करने, सिस्टम अपडेट करने में आपको अपना समय और धन खर्च नही करना पड़ता आदि आदि इत्यादि.

वहीं नुकसान भी हैं जैसे कि अगर आपको लाखों लोगों को एक साथ नुकसान पहुंचाना हो तो केवल एक क्लाउड सर्वर में हमला कीजिये और काम तमाम कीजिये.

अत: मैं समझता हूं कि क्लाउड कम्प्यूटिंग तथा क्लाइंट कम्प्यूटिंग दोनों की अच्छाइयों का इस्तेमाल ही फ़ायदे का सौदा है. क्लाउड के डाटा का बैक अप आपके पास क्लाइंट मशीन में भी हो यही समझदारी है. अभी क्लाउड तकनीक नई है अत: पूरा भरोसा ठीक नही है.

कुल मिलाकर

कुल मिलाकर मैं यही कह सकता हूं कि मशीनो को विकसित और सही दिशा में विकसित करना हमारी आवश्यकता है. कल्पना कीजिये कि गूगल ट्रांसलेशन अगर एकदम सही सही अनुवाद करने लगे तो अंग्रेजी का वर्चश्व दुनिया से खत्म हो सकता है. जो जानकारी अंग्रेजी में है सब हिंदी/चीनी/उर्दू/फ़्रेंच आदि में उपलब्ध हो जाये तो कितना अच्छा होगा.

मनुष्य का ज्ञान बढ़ता ही जा रहा है अत: उसे कागजों में सुरक्षित नही किया जा सकता है. उसके लिये मशीनों का अधिक विकसित होना जरूरी है.

हर तकनीक के साथ कुछ नकारात्मक और कुछ सकारात्मक होता है. इससे मशीनें भी अछूती नही हैं. पर बजाय उनसे डरने के उन समस्याओं को हल करना ही सही होगा.

और हां इन न्यूज चैनलों के बारे में याद रखिये कि इन्हे अपनी टीआरपी की पड़ी होती है और इस तरह के कार्यक्रमों में जो वीडियो ये दिखाते हैं वो मैट्रिक्स/टर्मिनेटर जैसी फ़िल्मों से लिये जाते हैं. अत: आप जितना डरेंगे और टीवी चालू रखेंगे उतना ही इन्हे फ़ायदा होगा. और यही वो चाहते हैं.

चलो बहुत हो गईं गंभीर बातें देखिये ये वीडियो. अगर मैट्रिक्स विंडोज पर चलती तो कैसा होता/होगा?

गूगल डाक्स में अनुवाद सुविधा जुड़ी

अब गूगल नें अपने आनलाइन आफ़िस सुईट में ट्रांसलेशन की सुविधा जोड़ दी है. यानि कि आप किसी भी डाक्यूमेंट को वहीं पर दूसरी भाषा में अनुवाद कर सकते हैं.

अनुवाद के लिये “टूल्स”>”ट्रांसलेट डाक्यूमेंट” में जाना पड़ता है. और पल भर में अनुवाद हो जाता है.

नीचे दिये गये स्क्रीनशाटों से ये और भी स्पष्ट हो जायेगा.

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गुरुवार, 27 अगस्त 2009

एयरटेल और डिश टीवी की सेवा में एक मजेदार अंतर

मैं अभी एयरटेल ब्राडबैंड और डिश टीवी दोनों की ही सेवायें ले रहा हूं. कुछ दिनों से ध्यान देने में एक खास अंतर दोनो की सेवाओं में पाया.

एयरटेल बिल जमा करने की आखिरी तारीख के करीब एक सप्ताह पहले से ही याद दिलाने के लिये फ़ोन करता है.(जिससे काफ़ी सुविधा हो जाती है)

वैसे डिश टीवी भी फ़ोन करता है. लेकिन पैसे जमा करने की आखिरी तारीख के ठीक दूसरे दिन. है ना मजेदार. फ़ोन आता है कि आपका डिश टीवी सब्सक्रिप्शन कल दिनांक xxx.xx.xxxx को समाप्त हो गया है आपने उसे रिन्यू करा दिया या नही? अरे भाई! आपके पास खुद ही पूरा डाटाबेस है १ क्लिक करके देख सकते हो. दूसरी बात जब याद ही दिलाना था तो पहले दिलाते बाद में ये पूछने का क्या मतलब?

मुझे तो डिश टीवी की सेवा में कोई खामी नजर नही आती है. पर हां अगर वो इस बारे में भी कुछ सुधार कर लें तो बहुत अच्छा रहेगा.

 

वैसे अजीबोगरीब चीजें टाटा इंडिकाम वाले भी करते हैं. इस लिंक को देखिये.

http://www.indiabroadband.net/tata-indicom-broadband/22255-tataindicom-broadband-customer-service-gives-away-confidential-customer-information.html

इस लिंक में मौजूद जब आप आडियो फ़ाइल को सुनेंगे तो पता लगेगा कि टाटा इंडिकाम वाले केवल आपका ईमेल आईडी लेकर आपकी पूरी जानकारी किसी को भी दे सकते हैं.

मंगलवार, 25 अगस्त 2009

एक्स रे से आपका लैपटाप कैसा दिखेगा

आज डिजिटल इंस्पाइरेशन में एक बढिया पोस्ट मिली(वैसे तो उनकी सभी पोस्टें जोरदार होती हैं). फ़िर भी ये कुछ ज्यादा ही खास थी. अमित जी ने निक वैसे(Nick Veasey) नाम के एक फ़ोटोग्राफ़र की चर्चा की जो कि रोजमर्रा की चीजों की एक्सरे तस्वीर बनाते हैं. और हां, इनकी “रोजमर्रा” की चीजों में फ़ूल पत्ती और मकड़ी से लेकर बस और हवाई जहाज तक शामिल है.

इनकी साइट यह है http://www.nickveasey.com/

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इनके कलेक्शन को पीडीएफ़ के तौर पर भी डाउनलोड किया जा सकता है:

http://www.nickveasey.com/NV%20Gallery%20Catalogue.pdf