गुरुवार, 29 जनवरी 2009

इंटरनेट का इतिहास - वीडियो

ऐपल काम कर रहा है ३ डी इंटरफेस पर

लिनक्स कहना विन्डोज़ ७। ऐपल सबको नानी याद दिलाने वाला है। एकदम नए तरह का ३ डी इंटरफेस ये रहे कुछ चित्र।
ये चित्र प्लानिंग के हैं। मुझे लगता है की ये अब तक का सबसे बढ़िया इंटरफेस होगा।
स्रोत : एपल इनसाइडर http://www.appleinsider.com/articles/08/12/11/apple_working_on_3d_mac_os_x_user_interface_images.हटमल




मंगलवार, 27 जनवरी 2009

लाइनेक्स की फ़्री ईबुक डाउनलोड करें (उबंटू पाकेट गाइड एंड रिफ़रेंस)

उबंटू लाइनेक्स की फ़्री ई बुक उपलब्ध है. इसे आप फ़्री में इलेक्ट्रानिक रूप में डाउनलोड कर सकते हैं अथवा कुछ पैसे देकर अमेजन.काम से खरीद सकते हैं.

कुल १७० पेजों की ये ई बुक गागर में सागर समान है.

इसे यहां से डाउनलोड कर सकते हैं

http://www.ubuntupocketguide.com/download.html

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बुधवार, 14 जनवरी 2009

वेबमिन: सर्वर कान्फ़िगर करने का बेहतरीन जी यूं आई.

एपाचे वेब सर्वर को कान्फ़िगर करने उसकी सेटिंग्स बदलने के लिए उसकी कान्फिगरेशन फाइल मे हाथ डालना पड़ता है। जो की सबके लिए आसान नही होता और गलतियाँ करने की भी संभावनाएं रहती हैं। इसका हल है वेबमिन।
वेबमिन वेब ब्राउजर बेस्ड सर्वर कान्फिगरेशन टूल है जो ना केवल अपाचे को बल्कि ढेर सारे अन्य सर्वर जैसे कि डाटाबेस सर्वर, मेल सर्वर, ऍफ़ टी पी सर्वर और एप्लिकेशन सर्वर्स को भी हैंडल कर सकता है।
वैसे तो मुख्या रूप से ये लिनक्स के लिए उपलब्ध है पर विन्डोज़ वाला पैकेज भी उपलब्ध कराया गया है। मुझे विन्डोज़ मे इसे इंस्टाल करने मे खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और नही कर पाया। लिनक्स के लिए आर पी एम् और डेब दोनों ही प्रकार के पॅकेज उपलब्ध हैं।
मैंने इसका डेबियन पैकेज अपने उबंटू आपरेटिंग सिस्टम मे डाला। ये आराम से इंस्टाल हो गया।
इसका इंटरफेस खोलने के लिए ब्राउजर मे ये टाईप करना पड़ता है : https://localhost:10000/
लाग इन पेज मे अपना उबंटू का यूजर नेम और पासवर्ड डालिए। और हो गया।
कुछ ध्यान देने योग्य बातें:
  1. वेबमिन का सर्वर अलग प्रोसेस के द्वारा चलता है। यानी कि ये आपके अपाचे सर्वर से बिल्कुल अलग चलता है। अगर आपनेअपाचे को बंद कर दिया है तो भी वेबमिन चलता रहेगा।
  2. वेबमिन इंस्टाल करने के पहले अगर एपाचे, माई एस क्यू एल और पी एच पी इंस्टाल है तो बेहतर रहेगा।
  3. वेबमिन की डिफाल्ट थीम बहुत बहुत साधारण दिखती है. अतः सलाह है कि कोई अच्छी सी थीम इंस्टाल कर लें।
  4. मेरी पसंद की थीम ये है : http://www.stress-free.co.nz/webmin-theme/
  5. वेबमिन को यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं http://www.webmin.com/
वेबमिन के स्क्रीन शॉट्स (ये सभी नई वाली थीम के साथ हैं। डिफाल्ट थीम अलग तरह से दिखती है )








वेबमिन से आप सर्वर्स को तो कान्फ़िगर कर ही सकते हैं इसके अलावा भी बहुत सारे अन्य काम भी कर सकते हैं जैसे कि साफ्टवेयरों को इंस्टाल अन इंस्टाल करना, स्टार्ट अप के प्रोग्राम्स को प्रबंधित करना, कमांड शेड्यूल करना, फायर वाल की सेटिंग्स बदलना, नेटवर्क सेटिंग्स बदलना, हार्ड डिस्क मे विभाजन करना आदि। इतने ज्यादा विकल्प इस प्रोग्राम मे हैं की अगर लिखना शुरू करुँ तो एक किताब बन जायेगी। इस प्रोग्राम से आप ब्राउजर से ही कम्पयूटर को बंद भी कर सकते हैं।
इसे वेब बेस्ड इंटरफेस देने का एक फायदा है। आप दूर से भी अपने सर्वर को स्टार्ट, स्टाप, रिस्टार्ट आदि कर सकते हैं।
वेबमिन एक तरह से आल इन वन पॅकेज है। अगर आप लिनक्स उपयोग करते हैं तो जरूर इसे उपयोग कीजिये। ये फ्री है।

गुरुवार, 8 जनवरी 2009

पायरेसी को कैसे कम किया जा सकता है.

अगर आप एक साधारण कम्प्युटर संस्थान मे एडमीशन लेते हैं कम्पयूटर सीखने के लिए तो आपको विंडोज, एम् एस आफिस सिखाया जाता है।
यदि आप कम्पयूटर के डिग्री कोर्सों मे भी दाखिला लेते हैं तो भी आप जावा, एम् एस आफिस, विंडोज, ऐ एस पी डाट नेट, विजुअल बेसिक आदि सीखते हैं।
अभी तक तो सब ठीक लग रहा है ना? हाँ?

नही!

अब सोचने वाली बात ये है की कितने संस्थान अपने यहाँ लाइसेंस्ड साफ्टवेयरों का प्रयोग करते हैं?
और ये भी सोचने वाली बात है की उसके कितने विद्यार्थी लाइसेंस्ड विन्डोज़ प्रयोग करते हैं?
मेरे पास किसी का आंकडा नही है। पर मैंने आज तक किसी को लाइसेंस्ड विन्डोज़ प्रयोग करते नही देखा है

और करे भी क्यों? विस्टा होम प्रीमियम की कीमत है $215.०० यानी कि लगभग १०००० रुपये।
बिजनेस प्रीमियम की है : करीब १२००० रुपये।
और अल्टीमेट एडीशन आता है करीब १६००० रुपये का
फ़िर एंटी वायरस, फायरवाल, एंटी स्पाइवेयर, आफिस सुइट, ग्राफिक साफ़्टवेयर भी तो खरीदने होते हैं।
और उपयोगकर्ता करीब ३०००० रुपये तो कम्पयूटर खरीदने मे ही खर्च कर चुका होता है।

अतः एक आम विद्यार्थी या आदमी बाजार से १००-200 रुपये मे अथवा इन्टरनेट से फ्री मे पायरेटेड विन्डोज़ खरीद लेता है।
इसके साथ वो अन्य साफ़्टवेयर भी पायरेटेड खरीदता/अथवा डाउनलोड करता .

भारत मे लोगों के पास इतना पैसा नही होता है कि वो लाइसेंस्ड क्लोस्ड सोर्स साफ़्टवेयर खरीद सकें।
ज्यादातर लोग पायरेटेड साफ़्टवेयर इसलिए उपयोग करते हैं क्योंकि उन्हें लाइनेक्स का ज्ञान नही होता है।
अब आपको मैंने पहले भी बता दिया है कि सामान्य कम्पयूटर शिक्षा मे हमेशा क्लोस्ड सोर्स साफ़्टवेयर पढाये जाते हैं। ना कि ओपन सोर्स।

सरकार गड़बड़ ये करती है कि वो आधा काम करती है।
अब देखिये देश भर मे जजों को लैपटाप वितरित किए गए हैं और उनमे रेड हैट लाइनेक्स डाला गया है।
पर कितनो को ये चलाना आता है? वो तो विन्डोज़ ही जानते हैं।

अगर हम सामान्य शिक्षा और डिग्री कोर्सों मे ओपन सोर्स साफ़्टवेयर पढ़ना शुरू करेंगे तो ये भारत जैसे विकास शील देश के लिए लाभकारी सिद्ध होगा. लोग जब लाइनेक्स से परिचित हो जायेंगे तो वो पायरेटेड, बार बार वायरसों से घिर जाने वाले विन्डोज़ को क्यों प्रयोग करेंगे।

इतने मंहगे साफ्टवेयरों को खूब एक्सपोजर मिलता है। लेकिन खरीदने मे बेहोशी आ जाए।
और ओपन सोर्स साफ्टवेयरों के बारे मे डिग्री कोर्सों मे नही पढाया जाता है।

अगर विजुअल बेसिक की जगह "क्यू टी" पाइथन, ऐ एस पी डाट नेट की जगह पी एच पी, एम् एस आफिस की जगह ओपन आफिस और विन्डोज़ की जगह लाइनेक्स पढाया जाए तो क्या बुराई है
क्लोस्ड सोर्स को अकेला ना किया जाए पर ओपन सोर्स साफ्टवेयरों को ज्यादा एस्क्पोजर मिलना चाहिए(कम से कम विकास शील देशों मे)।

कुछ लोग ये भी कहना शुरू कर देंगे कि ओपन सोर्स साफ़्टवेयर उतने अच्छे नही हैं जितने कि क्लोस्ड सोर्स। पर बंधू जब इनका उपयोग बढेगा तो डेवलपमेंट भी तेज हो जाएगा।