शनिवार, 29 अगस्त 2009

“मशीने मनुष्यों पर राज करेंगी” पर मेरे विचार

एक दिन मेरी अपने नानाजी से बातचीत हो रही थी. बातों बातों में वो बोल गए कि अमेरिका से अच्छी चीजें सीखना, रोबोट बनाना मत सीखना. मैने पहली बार सुना तो थोड़ा चौंक गया. फ़िर मुझे लगा कि कहीं ना कहीं उनके मुंह से वो डर बोल रहा था जो कि आजकल के इंडिया टीवी टाइप न्यूज चैनल फ़ैला देते हैं. वैसे दूसरे चैनल भी कम नही हैं.

सबसे पहली बात पूरी दुनिया में अभी तक ऐसी कोई मशीन नही है जिसमें एक काकरोच के बराबर भी बुद्धि हो. मनुष्य का दिमाग दुनिया की सबसे अधिक जटिल संरचनाओं में से एक है. और कम से कम मशीनें अभी उतनी जटिल नही हो पाई हैं. ऐसा मैं इसलिये भी कह सकता हूं क्योंकि मैंने एक दिन ए आई एम एल (आर्टीफ़ीशियल इंटिलीजेंस मार्कअप लैंग्वेज) को देखा. और ये अंदाजा लगाया कि मनुष्य के इतना सोचने के लिये इसमें अभी बहुत बहुत काम करना पड़ेगा. मनुष्य का दिमाग अपने आप में मनुष्य के लिये पहेली है. रोजाना नये प्रयोग होते हैं और नये तथ्य सामने आ रहे हैं. लेकिन अभी भी हम पूरी तरह से दिमाग को समझ नही पाये हैं. जिस दिन हम इसकी जटिलताओं को सुलझा लेंगे उस दिन शायद हम ऐसी मशीनें भी बना लें.

भविष्य में मशीनें मनुष्यों पर राज क्यों नही कर सकती हैं?

क्योंकि भविष्य ओपेन सोर्स का है. जी हां! मुझे लगता है कि किसी भी प्रकार की मानवीय भूल से निपटने का तरीका ओपेन सोर्स है. ना केवल साफ़्टवेयरों के मामले में बल्कि हार्डवेयरों के मामले में भी. उदाहरण के लिये एक संभावना व्यक्त की गई कि बहुत से नैनों रोबोट्स को समुद्र में फ़ैला तेल साफ़ करने के लिये छोड़ा गया पर प्रोग्रामिंग की एक गलती की वजह से वो हर  कार्बन से बनी चीजों को नष्ट करते गये. सुनने में ये बहुत बहुत डरावना लगता है. पर अगर हम इस पूरी तकनीक को ओपेन सोर्स कर दें तो पूरी दुनिया के एक्सपर्ट इस पर काम कर सकेंगे और हल खोज सकेंगे.

मैं समझता हूं कि ऐसी कोई भी तकनीक जिसका मामला सीधे जनता से जुड़ा हो मुफ़्त तथा मुक्त होनी चाहिये. जैसे कि वोटिंग मशीन का साफ़्टवेयर. अगर यह ओपेन सोर्स हो तो इसमें मौजूद हर खामी का पता जल्दी चलेगा तथा चुनाव भी अधिक ईमानदारी से संपन्न होंगे. अभी होता ये है कि किसी को इसके साफ़्टवेयर का पता नही तो कुछ दल अपनी ताकत के दम पर इंजीनियरों से इसे हैक करवा सकते हैं.

डर फ़िर भी है. लेकिन डरने की जरूरत नही है.

मुझे लगता है कि अगर कोई व्यक्ति असली दुनिया में अपराध करता है तो शायद वो बच जाये लेकिन इंटरनेट की आभासी दुनिया में नही बच सकता है. ऐसा इसलिये क्योंकि गीक्स की ये फ़ितरत ही होती है कि आप कुछ बनाओ और हम उसका तोड़ निकाल देंगे. यानि कि अगर आपने किसी तरीके से कोई फ़्राड कर भी दिया तो दूसरे तकनीकी गुरू उसका तोड़ निकालने में भिड़ जायेंगे(आदत से मजबूर जो होते हैं).

अब बात करते हैं क्लाउड की.

अभी जितनी जानकारी मुझे क्लाउड की हुई है उससे मुझे लगता है कि इसके अपने फ़ायदे और नुकसान हैं. फ़ायदा ये कि आपका डाटा एक जगह होता है आप उसे कहीं से प्राप्त कर सकते हैं. साफ़्टवेयरों को इंस्टाल करने, सिस्टम अपडेट करने में आपको अपना समय और धन खर्च नही करना पड़ता आदि आदि इत्यादि.

वहीं नुकसान भी हैं जैसे कि अगर आपको लाखों लोगों को एक साथ नुकसान पहुंचाना हो तो केवल एक क्लाउड सर्वर में हमला कीजिये और काम तमाम कीजिये.

अत: मैं समझता हूं कि क्लाउड कम्प्यूटिंग तथा क्लाइंट कम्प्यूटिंग दोनों की अच्छाइयों का इस्तेमाल ही फ़ायदे का सौदा है. क्लाउड के डाटा का बैक अप आपके पास क्लाइंट मशीन में भी हो यही समझदारी है. अभी क्लाउड तकनीक नई है अत: पूरा भरोसा ठीक नही है.

कुल मिलाकर

कुल मिलाकर मैं यही कह सकता हूं कि मशीनो को विकसित और सही दिशा में विकसित करना हमारी आवश्यकता है. कल्पना कीजिये कि गूगल ट्रांसलेशन अगर एकदम सही सही अनुवाद करने लगे तो अंग्रेजी का वर्चश्व दुनिया से खत्म हो सकता है. जो जानकारी अंग्रेजी में है सब हिंदी/चीनी/उर्दू/फ़्रेंच आदि में उपलब्ध हो जाये तो कितना अच्छा होगा.

मनुष्य का ज्ञान बढ़ता ही जा रहा है अत: उसे कागजों में सुरक्षित नही किया जा सकता है. उसके लिये मशीनों का अधिक विकसित होना जरूरी है.

हर तकनीक के साथ कुछ नकारात्मक और कुछ सकारात्मक होता है. इससे मशीनें भी अछूती नही हैं. पर बजाय उनसे डरने के उन समस्याओं को हल करना ही सही होगा.

और हां इन न्यूज चैनलों के बारे में याद रखिये कि इन्हे अपनी टीआरपी की पड़ी होती है और इस तरह के कार्यक्रमों में जो वीडियो ये दिखाते हैं वो मैट्रिक्स/टर्मिनेटर जैसी फ़िल्मों से लिये जाते हैं. अत: आप जितना डरेंगे और टीवी चालू रखेंगे उतना ही इन्हे फ़ायदा होगा. और यही वो चाहते हैं.

चलो बहुत हो गईं गंभीर बातें देखिये ये वीडियो. अगर मैट्रिक्स विंडोज पर चलती तो कैसा होता/होगा?

3 टिप्‍पणियां:

  1. मशीन कभी भी मनुष्य दिमाग की बराबरी नहीं कर पाएगी. अतः चिंता की कोई बात नहीं. ज्यादा जटील रोबोट बनाएं...

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  2. तकनीक को ओपेन सोर्स कर दें तो पूरी दुनिया के एक्सपर्ट इस पर काम कर सकेंगे और हल खोज सकेंगे.

    सही सोच है आपकी |

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