Wednesday 28 January 2009

भारत में सेक्सुअलिटी

अभी हाल ही में मैने राम सेना वालों की एक बात सुनी कि पब में जाकर शराब पीना हिंदू सभ्यता नही है बल्कि पश्चिमी है. वाह वाह मानो सब यहां दूध के धुले रहे हों. क्या यहां प्राचीन काल में शराब नही पी जाती थी? जुआ नही खेला जाता था? वेश्यायें नही होती थी? सब होता था. वो तब भी गलत था आज भी गलत है पर आप उसे पूरब पश्चिम और धर्म से क्यों जोड़ रहे हैं?

अगर ध्यान लगाकर देखा जाये तो पता लगेगा कि भारत में जो कार्य(शराब पीने से लेकर, पूजा पाठ करने तक) होते थे. उसी तरह पूरे संसार में भी होते थे. क्योंकि ईश्वर एक है. सारे धर्मों का मूल एक ही है.

रिश्ते

पता नही क्यों मुझे समझ नही आता है कि भारत में अगर एक मिडिल क्लास लड़के और लड़की के बीच प्यार की बात अगर सबको पता लग जाये तो इज्जत की बैंड बज जाती है. विशेष तौर पर लड़की वालों की ओर से. वैसे लड़कों का भी हाल बुरा ही है:

इस एड को देखिये:

 

मेरा मानना है कि

एक लड़के और लड़्की के बीच प्यार को बराबर इज्जत मिलनी चाहिये. कुछ लोग ये भी कहेंगे कि बच्चे नासमझ होते हैं कहीं गलत व्यक्ति को ना चुन लें तो मैं कहूंगा कि उनमें समझ विकसित करना उनके माता पिता का काम है.

मैने एक दिन डिज्नी की “इनचैंटेड” फ़िल्म देखी. ये फ़िल्म बहुत ही अच्छी है आप भी जरूर देखियेगा. इस फ़िल्म से यह सीखने को मिलता है कि रिश्तों की शुरुआत “डेटिंग” से करना अच्छा रहता है. ये फ़िल्म तलाक रोकने को भी कहती है.

डेटिंग का मतलब जो नही जानते (पहले मैं भी नही जानता था) उन्हे बताना चाहूंगा कि इसमें दो लोग (महिला और पुरुष) साथ में कुछ वक्त बिताते हैं और साथ में खाना खाते हैं. किसी प्रकार की “किसिंग” जैसी हरकत भी नही होती इसमें.

इस दौरान एक दूसरे के विचारों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. “आकर्षण” जो अक्सर स्कूलों से ही लड़के लड़कियों के बीच शुरू हो जाता है, डेटिंग से कम हो सकता है. मुझे लगता है जब वो एक दूसरे को अच्छे से समझेंगे तो धीरे धीरे मैच्योरिटी पैदा होगी. नही तो पता लगता है कि लड़के, लड़कियों से बात करने के नाम से ही बेहोश हो जाते हैं.

स्वस्थ रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिये एक दूसरे को अच्छी तरह समझना बेहद जरूरी है.

जब मां बाप को पता लगता है कि उनके लड़के या लड़की का कहीं “चक्कर” चल रहा है तो वो अपने बच्चों पर खूब गुस्सा होते हैं. मुझे लगता है कि ऐसी स्थिति में उनके बच्चे को गुस्से की नही बल्कि सही दिशा की जरूरत है.

घर का माहौल ऐसा होना चाहिये कि अगर उनके बच्चे को कोई पसंद आता है या उन्हे किसी प्रकार का किसी के प्रति आकर्षण महसूस होता है तो वे अपने माता पिता को बता सकें. और उनसे सलाह ले सकें.

सेक्स

भारत में सेक्स को एक निषिद्ध विषय की तरह लिया जाता है इसपर बात करने से बचा जाता है. सेक्स/पोर्न यानि अरे वो पश्चिमी सभ्यता है. सही सही बोल रहा हूं थ्रीसम के बारे में मैने सुना था पर फ़ोरसम पहली बार विकीपीडिया में देखा. मूर्ति थी खजुराहो की.  ये भी पश्चिमी है? http://en.wikipedia.org/wiki/File:Khajuraho-Lakshmana_Temple_erotic_detal4.JPG

कामसूत्र कहां लिखा गया? भारत में या अमेरिका में? बोलो?

अरे अमेरिका में तो सेक्स क्रांति को अभी मुश्किल से १००-१५० साल हुये होंगे. यकीन नही आता? आपको हिस्ट्री चैनल में प्लेजर प्रिंसिपल देखना चाहिये था. इससे काफ़ी जानकारी मिली. इसी दौरान कंडोम और गर्भनिरोधकों का भी खूब विकास हुआ.

फ़िर से बोलता हूं, जो यहां है वो पूरी दुनिया में है. और जो पूरी दुनिया में है वो यहां है.बल्कि मैं तो ये कहूंगा कि यहां पहले से ही है. इसे पूरब पश्चिम करके मत बांटो.  और अगर इस सबके बाद भी अगर हम इसे पूरब की बजाय पश्चिमी देन बतायें तो क्या ये अपनी पुरानी सभ्यता को भूलना नही कहलायेगा?

हालत ये है कि मैने अभी तक “कंडोम” शब्द बोलना सिखाने वाले एड देखे हैं(क्योंकि अभी लोग बोलने से ही कतराते हैं). उपयोग करना सिखाने वाले एड पता नही कब आयेंगे? विदेशों में तो आते हैं.

3 टिप्पणियाँ:

himanshu said...

tum jo yah sab kah kya vah puri jankari ke anusar kah rahe ho..
aur pracheen kal main bhi sharab peena aur jua khelna bhi ache raja ki pahchan nahi thi agar raja adhik jua ya sharab piya karte the to unke rajya ki janta unka bahishkar karti thi. raja hamesha apni limit main yah sab kaam kiya karte the jisse unki praja ko nukhsan naa ho.use samay bhi aurte aur ladkiya sharab nahi piya karti thi kyo vah kharab samjha jata tha.aur rahi bhari desho ki baat to america main log sharab isliye pite hai kyo ki vaha thand jyada hai. or isi karan vaha sharab ka asar jyada nahi hota.magar hamara desh garam desh hai isi karan yaha sharab peene ka koi jyada matalab nahi hai. aur agar sharab ladkiyo ne pi li to unka galat fayada uthaya ja sakta hai.
hamare desh main prachin kaal se kaam sutra bataya gaya hai magar us samay sex ek sundar tarike se pesh kiya gaya tha. aur iska upyog rajya ki jansankhya ko balance karne ya badhane ke liye kara jata tha magar aaj iska galat tarike se upyog hota hai example kisi ko galat nazar se dekhne,kisi ki izat lutne ke liye. aaj ke log ise ek bhookhe wolf ki pyas bhujane se jyada kuch nahi samajhte.ladkiya hi isme sabse asan chara hoti hai.

abhishek said...

cuckoo ke blog ke zzariye aaya...bahut accha post laga...aage bhi isi tarah ke post ke intezaar me..

अंकुर गुप्ता said...

abhishek ji, aapka bahut bahut dhanyawad.

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