Thursday 8 January 2009

पायरेसी को कैसे कम किया जा सकता है.

अगर आप एक साधारण कम्प्युटर संस्थान मे एडमीशन लेते हैं कम्पयूटर सीखने के लिए तो आपको विंडोज, एम् एस आफिस सिखाया जाता है।
यदि आप कम्पयूटर के डिग्री कोर्सों मे भी दाखिला लेते हैं तो भी आप जावा, एम् एस आफिस, विंडोज, ऐ एस पी डाट नेट, विजुअल बेसिक आदि सीखते हैं।
अभी तक तो सब ठीक लग रहा है ना? हाँ?

नही!

अब सोचने वाली बात ये है की कितने संस्थान अपने यहाँ लाइसेंस्ड साफ्टवेयरों का प्रयोग करते हैं?
और ये भी सोचने वाली बात है की उसके कितने विद्यार्थी लाइसेंस्ड विन्डोज़ प्रयोग करते हैं?
मेरे पास किसी का आंकडा नही है। पर मैंने आज तक किसी को लाइसेंस्ड विन्डोज़ प्रयोग करते नही देखा है

और करे भी क्यों? विस्टा होम प्रीमियम की कीमत है $215.०० यानी कि लगभग १०००० रुपये।
बिजनेस प्रीमियम की है : करीब १२००० रुपये।
और अल्टीमेट एडीशन आता है करीब १६००० रुपये का
फ़िर एंटी वायरस, फायरवाल, एंटी स्पाइवेयर, आफिस सुइट, ग्राफिक साफ़्टवेयर भी तो खरीदने होते हैं।
और उपयोगकर्ता करीब ३०००० रुपये तो कम्पयूटर खरीदने मे ही खर्च कर चुका होता है।

अतः एक आम विद्यार्थी या आदमी बाजार से १००-200 रुपये मे अथवा इन्टरनेट से फ्री मे पायरेटेड विन्डोज़ खरीद लेता है।
इसके साथ वो अन्य साफ़्टवेयर भी पायरेटेड खरीदता/अथवा डाउनलोड करता .

भारत मे लोगों के पास इतना पैसा नही होता है कि वो लाइसेंस्ड क्लोस्ड सोर्स साफ़्टवेयर खरीद सकें।
ज्यादातर लोग पायरेटेड साफ़्टवेयर इसलिए उपयोग करते हैं क्योंकि उन्हें लाइनेक्स का ज्ञान नही होता है।
अब आपको मैंने पहले भी बता दिया है कि सामान्य कम्पयूटर शिक्षा मे हमेशा क्लोस्ड सोर्स साफ़्टवेयर पढाये जाते हैं। ना कि ओपन सोर्स।

सरकार गड़बड़ ये करती है कि वो आधा काम करती है।
अब देखिये देश भर मे जजों को लैपटाप वितरित किए गए हैं और उनमे रेड हैट लाइनेक्स डाला गया है।
पर कितनो को ये चलाना आता है? वो तो विन्डोज़ ही जानते हैं।

अगर हम सामान्य शिक्षा और डिग्री कोर्सों मे ओपन सोर्स साफ़्टवेयर पढ़ना शुरू करेंगे तो ये भारत जैसे विकास शील देश के लिए लाभकारी सिद्ध होगा. लोग जब लाइनेक्स से परिचित हो जायेंगे तो वो पायरेटेड, बार बार वायरसों से घिर जाने वाले विन्डोज़ को क्यों प्रयोग करेंगे।

इतने मंहगे साफ्टवेयरों को खूब एक्सपोजर मिलता है। लेकिन खरीदने मे बेहोशी आ जाए।
और ओपन सोर्स साफ्टवेयरों के बारे मे डिग्री कोर्सों मे नही पढाया जाता है।

अगर विजुअल बेसिक की जगह "क्यू टी" पाइथन, ऐ एस पी डाट नेट की जगह पी एच पी, एम् एस आफिस की जगह ओपन आफिस और विन्डोज़ की जगह लाइनेक्स पढाया जाए तो क्या बुराई है
क्लोस्ड सोर्स को अकेला ना किया जाए पर ओपन सोर्स साफ्टवेयरों को ज्यादा एस्क्पोजर मिलना चाहिए(कम से कम विकास शील देशों मे)।

कुछ लोग ये भी कहना शुरू कर देंगे कि ओपन सोर्स साफ़्टवेयर उतने अच्छे नही हैं जितने कि क्लोस्ड सोर्स। पर बंधू जब इनका उपयोग बढेगा तो डेवलपमेंट भी तेज हो जाएगा।

11 टिप्पणियाँ:

anitakumar said...

बात आप की सही है। लिनेक्स की तारीफ़ सुन कर मैने कई साल तक अपने कंप्युटर पर लिनेक्स और विन्डोस दोनों रखा था लेकिन एक भी दिन लिनेक्स इस्तेमाल नहीं किया, तारीफ़ करने वाले ने इसके फ़ायदे तो बता दिये थे लेकिन इस्तेमाल करना नहीं बताया था। आखिरकार निकाल दिया।
अब आप तारीफ़ कर रहे हैं आशा है इसके बारे में और जानकारी देते रहेगें , खासकर ब्लोगिंग से संबधित जानकारी दें क्या लिनेक्स के इस्तेमाल से भी ब्लोगिंग हो सकती है।

अंकुर गुप्ता said...

"तारीफ़ करने वाले ने इसके फ़ायदे तो बता दिये थे लेकिन इस्तेमाल करना नहीं बताया था। आखिरकार निकाल दिया। "

अनीता जी, मैने जिस समस्या का जिक्र किया है आपका भी उसी से सामना हुआ.

आपको लिनक्स के बारे में इस ब्लाग में कई पोस्टें मिल सकती हैं देखने के लिये साइडबार में "लाइनेक्स" लेबल में क्लिक करें.

अंकुर गुप्ता said...

लाइनेक्स के बारे में कभी स्कूल कालेजों में पढ़ाया ही नही जाता है. केवल बातें की जाती हैं.

Udan Tashtari said...

दर असल कॉरपोरेट सेक्टर में तो माईक्रोसोफ्ट छाया हुआ है तो ट्रेनिंग भी उसी पर लेना होती है-क्या विकल्प है.

खुद के लिए लाइनेक्स सीख भी लें तो नौकरी के लिए तो MS पर जाना ही होगा अतः सीखना तो जरुरी है फिर भले ही पॉयरेटेड पर सीखें या लाइसेन्सड पर.

नरेश सिह राठौङ said...

आपके विचार से मै सहमत हू। मैने लाइनेक्स का नाम ही आपके ब्लोग पर पढ़ा था लेकिन अब इस के बारे मे अन्य ब्लोगो पर भी चर्चा होने लगी है । इसका अर्थ है कि धीरे धीरे इसका विस्तार हो रहा है फ़िर भी कुछ संकाये तो रहती है कि जो सोफ़्ट्वेयर windows पर चलते है वे इस पर काम करेंगें ?

Anonymous said...

खाक हो रहा है विकास लीनक्स में, हर कोई अपनी ढपली (डिस्ट्रिब्युशन) बनाने में लगा है. कोई स्टैन्डर्ड ही नहीं है. पी-एच-पी में बड़ा काम करना चाहो तो जेन्ड को पैसे देने पड़ते हैं पर्फोरमेन्स के लिये.

साला लीनक्स पर करेंगे क्या? बैठ के KDE और नोम का थोबड़ा देखें?

भाई अगर लीनक्स चलने लग जाये तो सोफ्टवेयर भी बन जायेंगे... लेकिन ऐसा तभी होगा जब आप ओपन सोर्स वाले अपना-अपना राग अलापना छोड़ कर मिल कर एक दिशा में काम करें... जहां छत्तीस OS हों वहां कौन जाये?

PD said...

अजी हम प्रयोग में लाते हैं अपना घरेलू लैपटॉप में भी लाईसेंस्ड साफ्टवेयर.. अब लैपटॉप के साथ फ़्री में आया था तो बस तभी से साथ है इसका.. :)

Amit said...

acchi jaankaari..

Anonymous said...

Hello ankur Bhaiya mein yeh keh raha tha ki kabhi Videocon ke Feedback Page par Bhi ek blog likho
is site ke Feedback Form Complaint form kam nahi karte or inki Service itni acchi hein ki apka product 1 month se pehle Repair hoker nahi aata Bhale hi Dealer ne Repairing ki ho

anirudha gupta said...
This post has been removed by the author.
Anonymous said...

http://www.videoconworld.com/sns_feedback.php

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