मंगलवार, 23 दिसंबर 2008

मैं गणित में फ़ेल क्यों हुआ?

बहुत दिनों से केवल तकनीकी विषयों पर ही लिख रहा था. आज सोचा कि कुछ और बात की जाये. वैसे तो मैं अच्छे नंबरों से पास होने वाला विद्यार्थी था पर ११वीं में सप्लीमेंट्री आ गया. पता है किसमें, गणित में. और पता है क्यों क्योंकि मुझे उसका उपयोग समझ में नही आया. असल में दिक्कत ये थी कि मेरे दिमाग की प्रोग्रामिंग दूसरों से थोड़ी अलग हुई है. मैं हर चीज को क्यों कैसे करके सोचता हूं. मैंने शिक्षा में एक बड़ी कमी पाई है कि उसमें किसी भी चीज का उपयोग नही बताया जाता है. उदाहरण के लिये हम भौतिकी, रसायन, गणित क्यों पढ़ते हैं? क्या कुछ बनाने के लिये? नही! बल्कि अच्छे नंबरों से पास होने के लिये और किसी प्रतियोगी परीक्षा में चुने जाने के लिये.

जब भौतिकी में वेक्टर पढ़ाया गया तो मेरे सिर के ऊपर से निकल गया. वो तो भला हो “टिम बर्नर ली” का जिन्होने इंटरनेट बनाया नही तो वेक्टर कभी समझ नही आता. मुझे ये तो पता था कि फ़ोर्स एक वेक्टर है क्योंकि इसमें एक दिशा होती है. पर वेक्टर को समझने के लिये ये काफ़ी नही था. फ़िर इंटरनेट में मुझे एक gif एनीमेशन मिला जिसमें एक नाव और पानी के बहाव की मदत से वेक्टर को समझाया गया था. जब मैने उसे देखा तब जाकर कुछ पल्ले पड़ा.

किसी तरह गणित में लाग के सवाल लगाना आने लगा. लेकिन यहां भी वही समस्या थी कि लाग का करें क्या? अचार तक तो डालकर खा नही सकते हैं. किसी टीचर से पूछो तो बताता था कि ये जो गणित आप पढ़ रहे हो ये साइंटिफ़िक कैल्कुलेशन में काम आयेगी. अब वो कैल्कुलेशन क्या है ये तो मुझे पता नही था. स्कूल छूटते ही लाग भी दिमाग से निकल गया.

अभी कुछ दिनों पहले मुझे अपनी साइट के लिये टैग क्लाउड बनाना था. नीचे वाले चित्र में आप उसे देख सकते हैं.

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इसमें होता ये है कि कोई भी टैग जितनी बार उपयोग में लाया जाता है उसी के अनुसार उसका फ़ांट साइज निर्धारित होता है. मैने इंटरनेट में इसके बारे में खोज बीन की तो कुछ लेख मिले उनमें से एक लेख में टैग क्लाउड बनाने का फ़ार्मूला दिया था. वो लाग के ऊपर आधारित था. मुझे पहली बार लाग के उपयोग के बारे में पता लगा. मैने फ़ार्मूला उपयोग किया और टैग क्लाउड तैयार हो गया. लेकिन अब मैं स्कूल वाला लाग भूल चुका था. अत: उस फ़ार्मूले की कार्य प्रणाली समझ में नही आई.

अब लगता है कि काश स्कूल में इसी तरह के छोटे छोटे उदाहरण लेकर अगर हमें पढ़ाया होता तो लाग समझ में आ गया होता. और इसका फ़ार्मूला ऐसा भी नही था कि ११वी १२वी का विद्यार्थी ना समझ सके.

अगर कभी मुझे शिक्षा मंत्री बनने का मौका मिला तो सबसे पहले मैं उस एजुकेशन सिस्टम को ठीक करूंगा जिसे हम मैकाले के समय से गरिया रहे हैं पर सुधार नही रहे हैं. हमारे बाप-दादाओं ने भी स्कूली निबंध में यही लिखा था कि एजुकेशन सिस्टम खराब है, मैं भी यही लिख रहा था और हमारे आने वाली पीढ़ी भी यही स्कूली निबंध लिख रही है कि एजुकेशन सिस्टम खराब है.

5 टिप्‍पणियां:

  1. गणित हमेशा से मेरा प्रि विषय रहा। शायद इसका कारण मेरे घर में इसका चलन हो या फिर मुझे अच्छे अध्यापक मिले।

    यह सच है कि किसी विषय पर रुचि उसके पढ़ाये जाने के ढ़ंग से आती है। हमारी शिक्षा प्रणाली बहुत रट्टाफिकेशन में विश्वास करती है। यह गलत है।

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  2. छोटी उम्र है आपकी और बडी बडी बातें करते हो....मै भी इंतजार में हूं कि कब हमारी शिक्षाप्रणाली में सुधार हो और बच्‍चों को बिना दवाब के पढना पडे....शुभकामनाएं।

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  3. मुझे भी उन्मुक्त जी की तरह गणित से प्यार है |
    ज़रा इसे तो देखिये |
    http://www.blogbharti.com/cuckoo/development/3875/

    You have been linked to BB.

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  4. गणित, और अन्य विषय भी, बच्चों को नहीं समझ में आने के पीछे एक कारण और है।

    सभी पाठ्यपुस्तक पहले अंग्रेजी में तैयार होते हैं, फिर हिंदी में उनका अनुवाद कर दिया जाता है। अनुवाद कई जगह ठीक से नहीं हुआ होता है। मूल अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक भी नीरस शैली में लिखी होती है, और अनुवाद के बाद तो यह नीरस दुगुनी हो जाती है।

    तब यदि बच्चे गणित न समझ सकें, तो उनका क्या दोष।

    दोष हमारी शिक्षा प्रणाली का है जो अब भी हिंदी में शिक्षण की व्यवस्था नहीं कर सकी है।

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