सोमवार, 2 जुलाई 2007

क्या ओपन सोर्स आपकी हर ज़रूरत को पूरा कर सकता है ?

आजकल जिसे देखो वही ओपन सोर्स की बड़ाई और माइक्रोसॉफ्ट को नीचा दिखने की कोशिश करता है।
कुछ ऐसा इसलिये करते हैं क्यूंकि विन्डोज़ विस्टा मे माइक्रोसॉफ्ट ने काफी कुछ ऐपल से कापी किया है।
या फिर इसलिये कि विन्डोज़ विस्टा की कीमत ज्यादा है।

अगर आप प्रोफेशनल हिसाब से कोई काम करना चाहते हैं तो क्या आप वो काम लीनक्स मे कर सकते हैं जैसे अच्छी क्वालिटी की वीडियो एडीटिंग या फिर एनीमेशन ।

अगर आप एक होम यूजर हैं तो जाहिर सी बात है कि आप म्यूजिक फोटो आदि का शौक़ रखते होंगे और आपके पास इनका एक बड़ा कलेक्शन है तो आप इन्हें विन्डोज़ विस्टा मे या एक्स पी मे मैनेज बेहतर कर सकते हैं । और ये तेज़ी से होता है ।

क्या आप एडोबी के कोई एप्लीकेशन लीनक्स मे चला सकते हैं जैसे आफ्टर ईफेक्ट्स आदि?

आफिस २००७ आपका काम ज़्यादा खूबसूरती और तेज़ी से कर सकता है या फिर ओपन ऑफिस २.२

रही बात सिक्यूरिटी की तो आप विन्डोज़ विस्टा के साथ एंटी वायरस का प्रयोग कीजिये मुझे नही लगता कि आपको परेशान होना पड़ेगा।

ये बात मैं इसलिये कह रहा हूँ क्यूंकि मैंने ज्यादातर लोगों से माइक्रोसॉफ्ट की बुराई और ओपन सोर्स से बड़ाई सुनी है।

हलाकि लीनक्स ने फ्री मे जो कुछ किया है वो अपने आप मे काबिले तारीफ है पर अभी भी ये फ्री की तरह ही है ।

3 टिप्‍पणियां:

  1. बंधु! बात फ़िर ज़िम्मेदारी की आ जाती है. अगर ओपेन सोर्स की बात करते हैं तो ज़्यादातर प्रोग्रामर शौकिया ही हैं, उनकी काबिलियत पर मैं प्रश्न चिन्ह नहीं लगा रहा. लेकिन समस्या क्रिटिकल हो तो? पेड सोफ़टवेयर मे तो कम्पनी की ज़िम्मेदारी बनती है. ओपरेटिंग सिस्टम के ममले में तो ये ११ साल सेवा देने की ज़िम्मेदारी है.

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  2. open source = मुक्त स्रोत का अपना अलग महत्व है। माईक्रोसॉफ्ट विण्डोज 98/2000/xp/2003/vista OS तथा अन्य ढेर सारे सॉफ्टवेयर निर्माता भी अपने विकास कार्य में भी open-source से बहुत से सूत्र/डैटा लेते हैं तथा विकास के बाद source गायब करके सिर्फ उपयोगकर्ता के उपयोग के लिए सॉफ्टवेयर बेचते हैं।

    ओपेन सोर्स में विकास सरल होता है। कम्यूटर विज्ञान के ज्ञाता के लिए लिनक्स आदि का उपयोग सरल होता है, किन्तु एक आम उपभोक्ता के लिए यह कठिन है।

    ओपेन सोर्स की सबसे बड़ी समस्या है अनेक प्रारूप, अनेक फ्लेवर्स, हरेक प्रोग्रामर अपने हिसाब से इसे बदलकर नये मुखौटे में अपना एक नया वर्सन निकाल लेता है। स्टेण्डर्डाइजेशन का अभाव है। जिससे आम उपभोक्ता को परेशानी होती है।

    समस्या दोनों ओर है, गुप्त स्रोत में भी और मुक्त स्रोत में भी। हमें दोनों ही चाहिए फिलहाल। लेकन यदि गुप्त स्रोत के स्रोत भी उपलब्ध हो जाएँ तो दोनों हाथों में लड्डू होंगे।

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  3. एक आम उपभोक्ता की जरुरतों को पूरा करने में ओपन सोर्स उत्पाद संभव हैं लेकिन प्रोफैशनल स्तर के उत्पाद का विकल्प यह नहीं हो सकते।

    इसके अतिरिक्त लिनक्स आदि पर काम करना एक आम उपभोक्ता के लिए आज भी (कम से कम विंडोज जितना) सरल नहीं।

    हरिराम जी ने ठीक कहा दोनों का अपना महत्व है।

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