शनिवार, 14 अप्रैल 2007

आतंकवाद या कलयुगी राक्षसवाद

आतंकवाद से हम सभी परिचित तो हैं ही, मैंने इस पर एक रिसर्च कि और ये पाया कि इस आतंकवाद को कोई वार्ता समाप्त नही कर सकती है क्योंकी आतंकवादियों के दिमाग में ज़हर भरा होता है। ज़हर से मेरा मतलब कि ये लोग दरअसल में राक्षस हैं , प्राचीन में जब जब राक्षसों का आक्रमण बढ़ता था तो भगवान पृथ्वी पर जन्म लेते थे और वो एक बार उन्हें चेतावनी देते थें और फिर उनका सर्वनाश कर देते थे। अतः हम इन्हें कलयुगी राक्षस भी कह सकते है। प्राचीन काल के राक्षसों पर सामान्य सम्झायिसों का असर नही होता था ठीक उअसी तरह आज के समाया में आतंकवादियों पर वार्ता का असर नही होता है क्यूंकि लातों के भूत बातों से नही मानते। इस समय कुछ शांति छाई हुई है मुझे तो डर लग रह है कि कही कोई साजिश ना रची जा रही हो । ये बात बिल्कुल सही है कि हमारी भारतीय संस्कृति में सत्य अहिंसा कि बात कही गई है पर इनमे उन प्रसंगो का भी उल्लेख मिलता है जब भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लेकर राक्षसों का विनाश किया । अतः अब ये बात हमारी सरकार को समझ लेनी चाहिऐ कि आतंकवाद अथवा राक्षसवाद की दवा की खोज अभी तक तो नही हुई है अतः इसका केवल एक ही इलाज है और वह है ऑपरेशन ।

4 टिप्‍पणियां:

  1. हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है अंकुर। मुझे खुशी के साथ साथ हैरानी भी है कि मेरा सपना सच होता दिख रहा है। लंबे समय से मेरा सोचना है कि हिन्दी चिठ्ठाजगत में किशोरों का प्रतिनिधित्व नगण्य है जो कि बढ़ना चाहिए। उम्मीद है आप अपने अन्य मित्रों को भी हिन्दी जगत से जोड़ने का प्रयास करेंगे।

    वैसे जिज्ञासा हो रही है कि आपका हिन्दी चिट्ठाजगत में आगमन कैसे हुआ। मेरा अंदाजा है कि आपने किसी चिट्ठाकार से जानकारी प्राप्त कर लिखना शुरु किया है।

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  2. संजय बेंगाणी14/4/07, 10:05 am

    भई खुब लिखा. मगर असुरो का नाश करने में राजनीति आड़े आ रही है.

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  3. चिठ्ठा जगत में आपका स्वागत

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  4. आप सभी का कमेंट्स देने के लिये धन्यवाद. शिरिश जी , मेरा हिन्दी ब्लोग में आगमन रविरतलामी जी से प्रेरणा लेकर हुआ है. मैं उनके ब्लोग का नियमित पाठक हू.

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